छत्तीसगढ़ प्रादेशिक मानव संसाधन विकास समिति के प्रदेश प्रवक्ता तथा अखिल भारतीय मानव अधिकार समिति के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री (प्रभारी झारखंड राज्य) बिरेंदर सिंह ने विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि जिस प्रकार पुराने समय से पंचायत को पंच परमेश्वर माना जाता था, वैसे ही सरकार में बैठे जनप्रतिनिधियों को भी ईश्वर का प्रतिनिधि मानकर लोकतंत्र में हम सभी को स्वयं इन प्रतिनिधियों को चुनने का अधिकार होता है, तथा लोकतंत्र की रक्षा में हर चयनित सरकार चाहे किसी भी पार्टी की बने, अच्छा कार्य करने लोकसेवा हेतु अपने अपने हिसाब से विशेष नीति बनाती है और कार्य करती है, जिसमें कुछ में सफल तो कुछ में असफल होती है, जिसे जनता अपनी कसौटी में परख कर मतदान कर लोकहित में जनादेश देती है और ये पंच वर्षीय जनदेश विकास में हमारी भी अहम भूमिका निभाता है। कई लोग दूर से जनप्रतिनिधियों को गाली देते रहते हैं परंतु जब बदलाव के लिए मतदान करने का शुभ अवसर मिलता है तो जानबूझ कर मतदान में हिस्सा नहीं लेते और कई बार उनका नापसंद व्यक्ति जीत कर आ जाता है, और पसंदीदा व्यक्ति की वोट संख्या गिर जाती है। इसलिए इस सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशी के व्यवहार, लोक सेवा की भावना, उसके पुराने विकास और जनसेवा के रिकॉर्ड को देखते हुए ही सभी को मतदान करना चाहिए, ना की दुर्भावना से ग्रस्त, स्वार्थ की राजनीति करने वालों को प्रलोभन में आकर वोट करे, ऐसी अपील श्री सिंह ने सभी नागरिकों से की है और ये भी कहा कि इसलिए लोकतंत्र में हम सब की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी हम सब की ही है, मजबूत राज्य और एक मजबूत राष्ट्र बने, यही हम सबका उद्देश्य होना चाहिए।
लोकतंत्र में सबसे जरूरी जिम्मेदारी और हिस्सेदारी है मतदान, जरूर करें, सरकारें जन सेवा के लिए—प्रदेश प्रवक्ता की अपील
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