राजनांदगांव। महिलाओं और बच्चों के बेहतर पोषण के लिए प्रयास एक बार फिर से तेज कर दिए गए हैं। कोरोना संक्रमणकाल में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए विशेष रूप से गर्भवती व धात्री महिलाओं तथा शिशुओं के खानपान की विशेष व्यवस्था बनाई जा रही है। इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी ने शुक्रवार को बैठक भी ली है। बैठक में स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित करने की रूपरेखा पर चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी क्रियाकलापों को गति देने के लिए 7 सितंबर से आंगनवाड़ी केंद्र फिर से शुरू कर दिए जाएंगे। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इसके लिए प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को आदेश जारी कर दिया है। इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग राजनांदगांव की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने बताया कि सभी जरूरी सुरक्षा उपायों के साथ आंगनवाड़ी केंद्रों को 7 सितंबर से फिर से शुरू किया जा रहा है। शुरू हो रहे आंगनबाड़ी केंद्रों में ज्यादा जोर पोषक आहार पर रहेगा, ताकि कुपोषण की दर नियंत्रित की जा सके। आंगनबाड़ी केंद्रों के पुन: संचालन के संबंध में गाइडलाइन भी जारी की गई है, जिसके अनुसार काम किए जाएंगे। इस संबंध में शुक्रवार को उन्होंने सीडीपीओ व सुपरवाइजरों की बैठक भी ली और शुरू किए जाने वाले आंगनवाड़ी केंद्रों की सूची बनाने के साथ ही विभिन्न आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। रेणु प्रकाश ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्र पुनरू शुरू करने से पूर्व पालकों की भी सहमति ली जाएगी।


इन शर्तों के साथ चलेंगे आंगनबाड़ी केंद्र
आंगनबाड़ी केंद्रों में 7 सितंबर से दोपहर का पोषण आहार बनाकर देना होगा। स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस के संचालन के पहले केंद्र का सैनिटाइजेशन का काम करना होगा। इस काम में निकाय से सहयोग लिया जा सकता है। भवन प्रवेश के पूर्व सभी की स्क्रीनिंग व बीमारी के लक्षण की जांच करनी होगी। भोजन बनाने वाले बर्तनों को क्लींजिंग पाउडर और गर्म पानी से साफ करना होगा। भोजन वाली थाली में पत्तल या केला पत्ता की व्यवस्था करनी होगी। सामाजिक दूरी के तहत एक निश्चित संख्या में यह काम करना होगा। एक समय में 15 से ज्यादा व्यक्तियों को भवन में रहने की अनुमति नहीं होगी। गर्म भोजन के लिए पात्र हितग्राही बच्चे, गर्भवती महिलाएं और अभियान से जुड़े हितग्राही ही आ सकेंगे। 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को मॉस्क पहनाने के संबंध में जारी दिशा-निर्देश का पालन करना होगा।
यहां बंद रहेंगे केंद्र
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से कंटेनमेंट जोन के लिए जो आदेश जारी किया गया है, उसके तहत ऐसे क्षेत्रों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। चिह्नांकित क्षेत्रों में टिफिन सुविधा पर विचार किया जा सकता है, लेकिन इस पर अंतिम फैसला अभी विचाराधीन है।
साढ़े 5 माह से बंद हैं आंगनबाड़ी केंद्र
कोरोना संक्रमण के बाद 14 मार्च से प्रदेशभर में आंगनबा?ी केंद्रों में ताला लगा हुआ है। हालांकि, इस बीच हितग्राहियों के घर सूखा राशन पहुंचाया जा रहा है।
कोविड-19 के नियमों का पालन जरूरी
जिले में 7 सितंबर से खुल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के सभी स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जा रहा है कि कैसे और किन लक्षणों से संक्रमितों की पहचान की जा सकती है। यह काम पूरी सावधानी से करना होगा। बताए गए लक्षणों में से एक भी लक्षण दिखे तो तत्काल उस हितग्राही और उसके पालक को सूचना देनी होगी। हर काम नियम के तहत करने होंगे।
कृमि मुक्ति के लिए भी होंगे कई आयोजन
राज्य शासन के निर्देशानुसार आगामी 23 से 30 सितंबर तक राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राजनांदगांव डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया कि इसके अंतर्गत समुदाय स्तर पर मितानिन एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा गृह भ्रमण कर 1 से 19 वर्षीय बच्चों को कृमि की दवा (अल्बेन्डाजोल) खिलाई जाएगी। एक साल से दो साल की उम्र वाले बच्चों को आधी गोली पीसकर, दो से तीन वर्ष के बच्चों को एक गोली पीसकर तथा तीन से 19 साल तक के बच्चों को एक गोली चबाकर खिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के आयोजन हेतु दिशा.निर्देश जारी किए गए हैं। कन्टेनमेंट जोन में स्थिति सामान्य होने के बाद ही यह सेवा प्रदान की जाएगी।

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