भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री तथा छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने सवाल उठाया है कि राज्य सरकार के कोष से प्रदेश में सेवा दे रहे अखिल भारतीय सेवाओं क्रमशः आईएएस, आईपीएस,आईएफएस,आईआरएस आदि के अफसरों को केन्द्र द्वारा देय तिथि से छत्तीसगढ़ राज्य के कोष से 46% प्रतिशत महंगाई भत्ता का भुगतान क्यों किया जा रहा है ? इसी तरह बिजली में भी कर्मचारियों व अधिकारियों को केंद्र के देय तिथि से 46 % डीए डीआर दिया जा रहा है, जबकि राज्य सेवा अधिकारियों और कर्मचारियों केन्द्र से देय तिथि से न देकर एरियर राशि को हजम करते हुये बुजुर्ग पेंशनरों और परिवार पेंशनरों को राज्य सरकार केवल 42%प्रतिशत महंगाई भत्ता दे रही है।ऐसा पक्षपात क्यों ? इस तरह प्रति माह लाखों में वेतन -भत्ता लेने वाले अनेक सुविधाओं से लैस अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को इस प्रदेश में सबसे अधिक महंगाई भत्ता का भुगतान करना राज्य सेवा अधिकारियों और कर्मचारियों तथा पेंशनरों व परिवार पेंशनरों के साथ घोर अन्याय है। जबकि विधानसभा चुनाव के दौरान मोदी की गारंटी देकर सरकार बनने पर केन्द्र के समान देय तिथि और दर से महंगाई भत्ता देने का वायदा किया गया था और जब वायदा पूरा करने के समय में मुंह छिपा रहे है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश के लाखों कर्मचारियों को 27 सितंबर को सामूहिक अवकाश लेकर हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। राज्य के सीनियर सिटीजन पेंशनर्स और परिवार पेंशनरों ने भी सरकार के खिलाफ कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन देने का निर्णय लिया है। जारी विज्ञप्ति में पेंशनर फेडरेशन के अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने आगे बताया है कि पेंशनरों के मामले में केन्द्र के समान महंगाई राहत देने में मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6)के कारण मध्यप्रदेश की सहमति बाध्यता सम्बन्धी झूठ का पर्दाफाश करने मुख्यसचिव अमिताभ जैन से समय मांगा है। क्योकि गत 24 वर्षो से सहमति की हौवा खड़ा करके दोनों सरकारें पेंशनधारी कर्मचारियों के साथ अन्याय करते आ रही है जबकि भारत सरकार ने करीब 5 वर्ष पहले ही 13 नवम्बर 17 को पत्र जारी कर इस अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। जारी विज्ञप्ति में आगे बताया गया है कि यदि एक पेन्शनर को 100 रुपये देना है तो दोनों राज्यों के कुल 6 लाख पेंशनर को मध्यप्रदेश से 74%और इन्ही सभी पेंशनरों को 26% छत्तीसगढ़ सरकार के खजाने से बजट देने होते हैं। हिसाब लगाने पर इसमें मध्यप्रदेश को 4 करोड़ 44 लाख व्यय करना पड़ेगा और छत्तीसगढ़ सरकार को 1करोड़ 56 लाख व्यय  होगा।परन्तु यदि मध्यप्रदेश अपने 5 लाख पेंशनर को 100 % भुगतान करता है उसे 5 करोड़ और छत्तीसगढ़ सरकार अपने 1 लाख पेंशनरों के केवल 1 करोड़ खर्च करने होंगे। इसतरह केवल 100 रुपये के भुगतान मे ही छत्तीसगढ़ शासन को 56 लाख रुपए का नुकसान हो रहा है। इसीलिए मध्यप्रदेश सरकार जानबूझकर 24 साल से पेंशनरी दायित्व को टालते आ रही है और जानबूझकर धारा 49 को विलोपित करने में रुचि नहीं ले रही है एकतरह से मध्यप्रदेश सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार के बजट में डाका डाला जा रहा है और छत्तीसगढ़ सरकार के अफसर इससे अनभिज्ञ होने का नाटक करते हुये आपसी मिलीभगत कर छत्तीसगढ़ के खजाने से लूट कराने में सहभागी बने हुये है। विज्ञप्ति में भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के वीरेन्द्र नामदेव, जे पी मिश्रा, द्रोपदी यादव,पूरन सिंह पटेल, अनिल गोल्हानी, बी के वर्मा, आर एन टाटी, राकेश जैन, आई सी श्रीवास्तव, मो कसीमुद्दीन, दिनेश उपाध्याय, ओ पी भट्ट, एस के घातोडे, आर डी झाड़ी, एस के कनौजिया पी एन उड़कुड़े, एस के देहारि, डॉ पी आर धृतलहरे, लोचन पांडेय,एस के चिलमवार,अनिल गोल्हानी,आर जी बोहरे,,कुंती राणा,निकोदियस एक्का, सुजाता मुखर्जी,आर के नारद,पी एल सिंह,एम एन पाठक, एस पी एस श्रीवास्तव, शांति किशोर माझी ,कलावती पाण्डे,सी एल चन्द्रवंशी,रमेश नन्दे, प्रदीप सोनी,राजेश्वर राव भोसले,अनूपनाथ योगी, हरेन्द्र चंद्राकर, बी एल यादव, नरसिंग राम, एम आर वर्मा, आदि ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से पेंशनरों व कर्मचारी हित मे त्वरित निर्णय लेने तथा मोदी की गारंटी को पूरा कर केंद्र के समान महंगाई भत्ता एरियर सहित भुगतान करने तुरन्त आदेश जारी करने की मांग की है।

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