भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश ने छत्तीसगढ़ शासन वित्त विभाग पर जानबूझकर वरिष्ठ नागरिक पेंशनरों की उपेक्षा करने और आर्थिक स्वत्वो के भुगतान करने में विलम्ब करने का आरोप लगाया है। जारी विज्ञप्ति में पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने आगे बताया है कि छत्तीसगढ़ में जब जब महंगाई राहत देने की बात होती है हर बार नियमित कर्मचारियों के बाद धारा 49 के तहत मध्यप्रदेश शासन से सहमति लेने के नाम पर आदेश देर से जारी किया जाता है। अभी हाल ही में 17 अक्टूबर 24 को कर्मचारियों के लिए 4% महंगाई भत्ता(डीए) आदेश जारी करने के बाद पेंशनरों को दीपावली पूर्व महंगाई राहत(डीआर) देने के मामले में वित्त विभाग खामोश है। मध्यप्रदेश राज्य सरकार से सहमति के लिए पत्राचार की जानकारी का भी अता – पता नहीं है। यदि सहमति मांगा गया है तो पत्र को मीडिया से प्रचारित करने में गुरेज क्यों है समझ से परे है। इसी तरह अभी कल ही 22 अक्टूबर 24 को वित्त विभाग ने 28 अक्टूबर तक नियमित कर्मचारियों को वेतन का भुगतान करने का निर्देश जारी किया है इस निर्देश में निगम,मंडल,प्राधिकरण, आयोग, विश्वविद्यालय, स्थानीय निकाय,सार्वजनिक उपक्रम, अन्य संस्थाओं को भी 28 अक्टूबर के पूर्व भुगतान के कार्यवाही का उल्लेख किया गया है परंतु राज्य के महत्वपूर्ण कड़ी बुजुर्ग पेंशनर और परिवार पेंशनरों को भूल गए मानों दिवाली त्यौहार उनके लिए या उनके परिवार के लिए नहीं है। उन्हें दीपावली में जश्न मनाने का अधिकार नहीं है। छत्तीसगढ़ वित्त विभाग छत्तीसगढ़ प्रदेश के पेंशनरों के हक मारने में अग्रणी भूमिका में है। मध्यप्रदेश सरकार मोदी की गारंटी के परिपालन में कर्मचारियों और पेंशनरों को नई सरकार के बाद एरियर का भुगतान करना चाहती है उन्होंने जुलाई 23 से कर्मचारियों एवं पेंशनरों को एरियर का भुगतान करने का निर्णय लिया। कर्मचारियों को भुगतान हो गया। पेंशनरों को भुगतान करने छत्तीसगढ़ सरकार से सहमति मांगी गई परंतु छत्तीसगढ़ सरकार ने सहमति नहीं दिया। दोनों राज्य के 6 लाख से अधिक पेंशनर को 8 माह के एरियर से वंचित कर दिया। उल्लेखनीय है मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 के तहत दोनों राज्यों को आर्थिक भुगतान में दोनों राज्य का बजट लगता है।
जारी विज्ञप्ति में भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश से जुड़े वीरेन्द्र नामदेव, द्रोपदी यादव,पूरन सिंह पटेल, जे पी मिश्रा, अनिल गोल्हानी, बी एस दसमेर, सुरेश मिश्रा,बी के वर्मा,आर एन ताटी,दिनेश उपाध्याय,प्रदीप सोनी,आर जी बोहरे,राकेश जैन,महेश पोद्दार,ओ पी भट्ट, पी एन उड़कूड़े,रैमनदास झाड़ी, जगदीश कनौजिया,एस के घाटोडे, नैन सिंह, शंभू नाथ देहारी, डी आर गजेन्द्र, रणविजय सोनी, एस एस भदौरिया, बसंत गुप्ता,पिताम्बर पारकर,हेमंत टांकसाले,नागेश कापेवार,प्रवीण त्रिवेदी, डॉ पी आर धृतलहरे,एच एल नामदेव,के आर राजपूत,विनोद जैन, सी एम पांडेय,जे पी भारतीय,गायत्री गोस्वामी,अनूप डे, मो. कसीमुद्दीन, कमलसाय भद्रे, मो. कासिम, सुभाष मंडल,सी एल चंद्रवँशी,बरातूराम कुर्रे,आई सी श्रीवास्तव, शैलेन्द्र कुमार सिंह,शरद अग्रवाल,डॉ एस पी वैश्य,बी डी उपाध्याय,बी एल यादव,नरसिंग राम,आर के नारद,सुरेश शर्मा,एस के चिलमवार,लोचन पांडेय,एस के एस श्रीवास्तव,आलोक पांडेय,तीरथ यादव,रमेशचन्द्र नन्दे,जगदीश सिंह,उर्मिला शुक्ला,कुंती राणा, वन्दना दत्ता, कलावती पाण्डे, पी भारती,परसराम यदु,अनूप योगी,ओ डी उपाध्याय,बी एल गजपाल,एन के भटनागर, डी के त्रिपाठी, एम आर शास्त्री, मीता मुखर्जी, सोमेश्वर प्रसाद तिवारी,हरेंद्र चंद्राकर,व्ही टी सत्यम, मो.अय्यूब खान,रविशंकर शुक्ला,गुज्जा रमेश,,लोकचंद जैन, एम एल पाल, अवधराम घृतलहरे, मालिक राम वर्मा,नागेंद्र सिंह ने पेंशनरों को केंद्र के समान जनवरी 24 से 4% और जुलाई 24 से 3% महंगाई राहत (डीआर) तथा अक्टूबर का पेंशन कर्मचारियों की तरह 28 अक्टूबर 24 तक भुगतान करने के आदेश तुरंत जारी करने की मांग की है।
पेंशनरों को 28 अक्टूबर तक पेंशन भुगतान के आदेश करना भूल गया वित्त विभाग, वित्त विभाग द्वारा जानबूझकर पेंशनरों की उपेक्षा
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