मध्य प्रदेश की व्यापारिक राजधानी इंदौर में एक मानवीय मिसाल पेश करते हुए स्थानीय व्यापारी स्वर्गीय सुरेंद्र जैन के अंगदान ने कई जिंदगियों को नया जीवन प्रदान किया। ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद उनके लिवर, दोनों हाथ, दोनों किडनी, आंखें और त्वचा दान की गई। इस अवसर पर इंदौर में 60वें ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण किया गया, जिससे अंगों को समय पर गंतव्य तक पहुंचाया जा सका।
सुरेंद्र जैन: एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व
मनोरमा गंज, इंदौर निवासी और टाइल्स व्यवसायी सुरेंद्र जैन (पोरवाल) शेल्बी हॉस्पिटल में उपचाररत थे। ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद मुस्कान ग्रुप ने परिवार से अंगदान का अनुरोध किया। परिवार ने सहर्ष सहमति दी और इसके बाद चिकित्सा विशेषज्ञों, प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से तीन ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए।
तीन ग्रीन कॉरिडोर: समर्पण और सहयोग की मिसाल
प्रथम ग्रीन कॉरिडोर: शेल्बी हॉस्पिटल से एयरपोर्ट के लिए शाम 6:25 पर शुरू होकर 6:37 पर समाप्त हुआ।
दूसरा ग्रीन कॉरिडोर: राजश्री अपोलो हॉस्पिटल के लिए 6:32 पर संपन्न हुआ।
तीसरा ग्रीन कॉरिडोर: चोइथराम हॉस्पिटल के लिए 6:35 पर संपन्न हुआ।
राष्ट्रीय स्तर पर अंगों के आवंटन की प्रक्रिया के तहत,
हाथ: ग्लोबल हॉस्पिटल, मुंबई
लिवर: जूपिटर हॉस्पिटल, मुंबई
एक किडनी: चोइथराम हॉस्पिटल
दूसरी किडनी: राजश्री अपोलो हॉस्पिटल
नेत्र: एमके इंटरनेशनल आई बैंक
त्वचा: चोइथराम स्किन बैंक
सोटो कार्यालय बना आपातकालीन वार रूम
इंदौर संभाग आयुक्त दीपक सिंह की निगरानी में एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता और इंदौर सोसाइटी फॉर ऑर्गन डोनेशन के सेक्रेटरी डॉ. वीपी पांडे की टीम ने राष्ट्रीय स्तर पर अंगों के आवंटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान सोटो कार्यालय को वार रूम में तब्दील कर दिया गया, जहां से हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी गई।
मुस्कान ग्रुप के सेवादार जीतू बगानी, संदीपन आर्य, राजेंद्र माखीजा, लकी खत्री और भूमिका आर्य के साथ प्रशासन, चिकित्सा अधिकारी, ट्रैफिक पुलिस और चिकित्सा दल ने इस प्रक्रिया को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एक नया जीवन, एक नई आशा
स्वर्गीय सुरेंद्र जैन के इस अद्वितीय योगदान ने न केवल जरूरतमंदों को नया जीवन दिया, बल्कि समाज को अंगदान की अहमियत समझाने का संदेश भी दिया। इंदौर में बना यह 60वां ग्रीन कॉरिडोर इस बात का प्रतीक है कि मानवता और सेवा का जज्बा किसी भी कठिनाई को पार कर सकता है।
यह घटना इंदौर और पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। स्वर्गीय सुरेंद्र जैन के अंगदान ने न केवल जरूरतमंदों को जीवनदान दिया, बल्कि समाज को एक बार फिर यह सीख दी कि “जीवन के बाद भी, हम किसी और की जिंदगी को रोशन कर सकते हैं।”

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