छत्तीसगढ़ राज्य में पेंशनरों और कर्मचारियों को महंगाई राहत भत्ता देने के मामले में राज्य के सत्ता में पदारुढ़ भाजपा की विष्णुदेव साय की सरकार पूर्ववर्ती कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार के नक्से कदम पर चल रही है। उनके द्वारा इस मामले में विधान सभा चुनाव में केन्द्र के देय तिथि व दर से डीए डीआर देने देने की मोदी की गारंटी की उपेक्षा पर हैरानी जाहिर किया है। उक्त बातें जारी विज्ञप्ति में देते हुए छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेंशनर फेडरेशन के प्रदेश संयोजक एवं भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव ने आगे बताया है कि भूपेश सरकार ने अपने पूरे 5 साल के कार्यकाल में पेंशनरों और कर्मचारियों को कभी भी केन्द्र सरकार के समान डीए डीआर नहीं दिया और इन पांच सालों में पेंशनरों तथा कर्मचारियों को इसके लिए तरसाते रहे तथा एरियर के करोड़ों रुपए हजम कर गए। उन्होंने पेंशनरों को डीआर देने हेतु मध्यप्रदेश सरकार के किसी प्रस्ताव को नहीं माना। जिसका खामियाजा कांग्रेस सरकार को विधानसभा चुनाव मे भुगतना पड़ा और सरकार चली गई।आज इन 1 वर्ष के कार्यकाल में वही स्थिति विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चल रही भाजपा सरकार में भी देखने को मिल रहा है। केन्द्र सरकार के अनुसार भूपेश बघेल सरकार में जुलाई 23 से 4% प्रतिशत महंगाई भत्ता विधानसभा चुनाव के पहले से लंबित था।सबको उम्मीद था कि विधानसभा चुनाव के तुरन्त बाद पेंशनरों और कर्मचारियों को डीए डीआर के आदेश जारी होंगे परंतु ऐसा नहीं हुआ और लम्बे इंतजार के बाद लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के ठीक पहले घोषित किया गया।
मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 के बाध्यता के चलते पेंशनरों को जुलाई 23 से 4% डीआर देने मध्यप्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार से सहमति मांगा परन्तु छत्तीसगढ़ सरकार ने जुलाई 23 से देने के प्रस्ताव को रद्द कर मार्च 24 से देना मान्य कर दोनों राज्य के 7 लाख से अधिक पेंशनर व परिवार पेंशनरों का प्रति व्यक्ति हजारों रूपये का नुकसान कर दिया। इस मामले पर विधानसभा चुनाव के दौरान जारी घोषणा मोदी के गारंटी को भी फेल कर दिया जिसमें वादा किया गया है कि भाजपा सरकार आने पर राज्य में कर्मचारियों को केन्द्र के बराबर देय तिथि और दर पर डीए दिया जायेगा। विष्णुदेव साय सरकार ने इस मामले में मोदी के गारंटी का सम्मान नहीं किया जो कर्मचारी जगत में कौतूहल का विषय बना हुआ है। जारी विज्ञप्ति में छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील पेंशनर कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष आर के थवाईत, छत्तीसगढ़ पेंशनधारी कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ डी पी मनहर, पेंशनर्स एसोशियेशन छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष यशवंत देवान , छत्तीसगढ़ प्रगतिशील पेंशनर कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष आर के थवाईत तथा छत्तीसगढ़ पेंशनर समाज के अध्यक्ष ओ पी भट्ट ने मुख्य सचिव व अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर छत्तीसगढ़ राज्य में पेंशनरों के महंगाई राहत के मामलें में मुख्यमन्त्री को गुमराह करने, सच्चाई से अनभिज्ञ रख कर छत्तीसगढ़ को आर्थिक नुकसान पहुँचाने आरोप लगाया है और धारा 49 के नाम पर छत्तीसगढ़ के खजाने में लगभग 24 वर्षो से हो रहे अरबों की हानि को संज्ञान में लेकर इस पर रोक लगाने की मांग करते हुए कर्मचरियों के साथ साथ पेंशनरों के लिए अभी भी जुलाई 24 से बकाया 3% प्रतिशत महंगाई राहत के आदेश तुरन्त जारी करने की मांग की है।

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