शराब घोटाले में संलिप्तता के आरोप में जेल में बंद आबकारी विभाग के पूर्व विशेष सचिव अरुण पति त्रिपाठी को सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कड़ी शर्तों के आधार पर जमानत दे दी है। कोर्ट ने आदेश दिया कि त्रिपाठी को 10 अप्रैल को रिहा किया जाए ताकि चल रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच प्रभावित न हो।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अभय ओक और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की डिवीजन बेंच में त्रिपाठी की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। ईडी और राज्य शासन ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जांच अभी जारी है और उनकी रिहाई से जांच प्रभावित हो सकती है। राज्य शासन ने यह भी आशंका जताई कि जेल से बाहर आने के बाद वे साक्ष्यों को प्रभावित करने का प्रयास कर सकते हैं।

डिवीजन बेंच ने कहा कि त्रिपाठी पिछले 11 महीनों से जेल में हैं और निकट भविष्य में मुकदमे की सुनवाई शुरू होने की संभावना नहीं दिख रही है। कोर्ट ने जमानत देते हुए स्पष्ट किया कि उन्हें 10 अप्रैल तक जेल में ही रहना होगा।

गिरफ्तारी और आरोप
12 अप्रैल, 2024 को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने अरुण पति त्रिपाठी को रायपुर से गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, और 120-बी के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 12 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

बिलासपुर हाई कोर्ट ने 30 सितंबर, 2024 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन पर शराब व्यापार में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था।

सिंडिकेट में संलिप्तता का आरोप
त्रिपाठी पर छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (CSMCL) के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य करते हुए एक सिंडिकेट के संचालन का आरोप है। इस सिंडिकेट के माध्यम से:
शराब आपूर्तिकर्ताओं से अवैध कमीशन लिया जाता था।
सरकारी दुकानों से अवैध शराब बेची जाती थी।
अन्य भ्रष्ट गतिविधियों को अंजाम दिया जाता था।

सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपाठी को जमानत देते हुए कुछ कड़ी शर्तें लगाई हैं:
उन्हें अपना पासपोर्ट जांच अधिकारी को सौंपना होगा।
आरोप पत्र दाखिल होने तक हर दिन सुबह 10 बजे जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

10 अप्रैल को सत्र न्यायालय में पेशी अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत, त्रिपाठी को 10 अप्रैल को सत्र न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहां जमानत की अंतिम शर्तें तय की जाएंगी। इसके अलावा, उन्हें सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई शर्तों का भी पालन करना होगा।

इस घोटाले से जुड़े अन्य आरोपियों को भी सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त जमानत दी है:
अनुराग द्विवेदी: जांच पूरी होने के बाद उन्हें 10 दिनों के भीतर सत्र न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।
दिलीप पांडे: पिछले आठ महीनों से हिरासत में रहे पांडे को त्रिपाठी जैसी शर्तों पर जमानत दी गई।
दीपक दुआरी: जांच पूरी होने के बाद उन्हें 10 दिनों के भीतर सत्र न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहां उन्हें पासपोर्ट सरेंडर करने और जांच में सहयोग करने की शर्तों पर जमानत दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद सभी आरोपियों की रिहाई 10 अप्रैल को होगी।

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