जल अमूल्य है, जल है तो कल जीवन है। जल हमारा खजाना है, आइये इसे सहेजे और संरक्षित करें। वक्त का यह तकाजा है, बंूद-बूंद पानी की बचत जल सरंक्षण के लिए हमारी आज की जरूरत है। वर्षा के जल को सहेजते हुए सघन पौधरोपण कर हम धरती एवं पर्यावरण को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी हम सभी की है। जब नगर पालिक निगम से यह सूचना मिली कि पानी अब सिर्फ 1 घंटे आएगा। तब इस चिंताजनक स्थिति की गंभीरता प्रगट हुई कि यह एक विकट स्थिति हो सकती है। जिले में 42 हजार बोरवेल तथा ट्यूब वेल से भू-जल का अत्यधिक दोहन किए जाने के कारण जल संकट की स्थिति निर्मित हुई है। शिवनाथ नदी में किसानों द्वारा बोरवेल के माध्यम से पानी का अधिक दोहन करने के कारण भू-जल स्तर में कमी आयी है। जल संरक्षण की दिशा में नवीनतम तकनीक का उपयोग करते हुए विभिन्न उपायों को अपनाना होगा। ग्लोबल वार्मिंग के कारण भीषण गर्मी और बढ़ता तापमान एक दस्तक है कि हमें जल संरक्षण, पौधरोपण तथा प्रकृति के संरक्षण के प्रति सजग होना चाहिए। अभी भी देर नहीं हुई है। जल संरक्षण की दिशा में सशक्त कदम बढ़ाने की जरूरत है। जिले में मिशन जल रक्षा के अंतर्गत जल संरक्षण के लिए जनसहभागिता से व्यापक पैमाने पर कार्य किया जा रहा है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के नेतृत्व में जिले भर में इस अभियान को गति प्रदान करते हुए कार्य किया जा रहा है। हम सभी का यह कर्तव्य है कि जल संरक्षण एवं पौधरोपण के लिए अपना योगदान दें।

शहर में हालांकि पानी की समस्या का समाधान हो गया और मोंगरा बैराज से 1 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। मोंगरा बैराज से मोहारा एनीकट में जल की आपूर्ति की गई, जिससे शहर में पेयजल की समस्या दूर हुई। राजनांदगांव के मोखली एवं रातापायली एनीकट में जल संरक्षित कर रखा जा रहा है। मोहारा एनीकट में पानी कम होने पर मोखली एवं रातापायली एनीकट से 15 अप्रैल तक पानी की आपूर्ति होगी। इस दौरान डेढ़ महीने तक मोंगरा बैराज से पानी नहीं छोड़ा जाएगा। 15 अप्रैल के बाद जून तक मोंगरा बैराज से पानी की आपूर्ति होगी। किसानों द्वारा रातापायली एनीकट से ऊपर 5-6 एनीकट में गेट बंद कर दिए जाते थे, जिसे वेल्ड कराया गया और एनीकट से सुचारू रूप से पानी आ रहा है। सांकरदाहरा, धनगांव, दाऊटोला एनीकट के गेट को अस्थायी रूप से वेल्ड किया गया है, ताकि सतत जलापूर्ति होती रहे। शिवनाथ नदी के गहरीकरण का कार्य औद्योगिक संस्थानों, स्वयं सेवी संस्थानों एवं जनसहभागिता से किया जाएगा। शिवनाथ नदी के गहरीकरण से जल का भराव होगा तथा जल स्तर में बढ़ोत्तरी होगी। इसके साथ ही शिवनाथ नदी के तट पर जमी गाद, मिट्टी एवं कचरे की साफ-सफाई का कार्य किया जा रहा है। शिवनाथ नदी के गहरीकरण से जल का भराव होगा तथा जल स्तर में बढ़ोत्तरी होगी। इसके साथ शिवनाथ नदी के तट पर जमा गाद, मिट्टी एवं कचरे की साफ-सफाई का कार्य किया जायेगा।

कलेक्टर संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में जिला पंचायत सीईओ सुश्री सुरूचि सिंह एवं टीम द्वारा भू-जल स्तर बढ़ाने एवं विभिन्न वाटर स्ट्रक्चर का निर्माण किया जा रहा है। मिशन जल रक्षा के तहत मनरेगा अंतर्गत 2630 वाटर स्ट्रक्चर स्वीकृत किए गये है, जिनमें से 2132 जलीय संरचना के निर्माण का कार्य पूर्ण हो गया है। अब वक्त आ गया है कि जल संरक्षण के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किए जाए। छोटे-छोटे प्रयास से जल संरक्षण की दिशा में हम सभी अपना योगदान दे सकते हैं। अब तक जिले में मनरेगा के अंतर्गत 50 हजार वाटर रिचार्ज स्ट्रक्चर का निर्माण किया गया है। जिसमें 2250 मिनी परकोलेशन टैंक, 44 हजार स्ट्रेगर ट्रैंच, 981 कन्टूर ट्रैंच, 144 गैबियन स्ट्रक्चर, 274 बोल्डर चैक डैम, 987 कुआं, 145 डाइक जैसे वाटर स्ट्रक्चर का निर्माण किया गया है। भू-जल स्तर को बढ़ाने के लिए बोरवेल रिचार्ज साफ्ट सैंड फिल्टर तथा पर्कोलेशन टैंक में इंजेक्शन वेल का निर्माण वेल का निर्माण किया जा रहा है। भू-जल के रिचार्ज हेतु रिचार्ज शाफ्ट, जल संरक्षण के लिए भू-जल के रिचार्ज हेतु 1 हजार इंजेक्शन वेल का लक्ष्य रखा गया है।

भारत सरकार की जल जीवन मिशन योजना का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवारों को नल के माध्यम से निरंतर एवं पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पेयजल प्रदाय करना है। जिले में जल जीवन मिशन अंतर्गत सभी 662 ग्रामों में नलजल योजनाएं एवं सोलर आधारित योजनाएं स्वीकृत की गई है, जिनमें 150 ग्रामों में योजना पूर्ण एवं 512 ग्रामों में योजना का कार्य प्रगतिरत है। 96 ग्रामों को हर घर जल प्रमाणित किया जा चुका है। जिले के कुल 1 लाख 56 हजार 789 ग्रामीण परिवारों में से 1 लाख 39 हजार 799 ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन प्रदाय किया जा चुका है। जिले में जल जीवन मिशन अंतर्गत 194 ग्रामों को सम्मिलित करते हुए सतही स्त्रोत पर आधारित 2 समूह जल प्रदाय योजनाएं भी स्वीकृत हैं, जिनका कार्य प्रगतिरत है।

धान की फसल को अत्यधिक जल की आवश्यकता (140-150 सेमी) होती हैं। जिले में 42000 नलकूपों द्वारा भूमिगत जल का अंधाधुंध दोहन होने के कारण भविष्य में पेयजल निस्तारी एवं अन्य उपयोग के लिए जलसंकट होगा। कम जल आवश्यकता वाली फसलें-मक्का (50-60 सेमी), दलहन (25-30 सेमी), सोयाबीन (60-70 सेमी), तिल (30-36 सेमी), गेहूं (45-50 सेमी), रागी (50-55 सेमी) जैसी फसलों की खेती करके ग्रीष्मकालीन धान के क्षेत्र को हतोत्साहित करने की रणनीति तैयार की गई हैं। इस जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में फरवरी 2024 से निरंतर कृषक प्रशिक्षण कार्यशाला एवं संगोष्ठियों के माध्यम से कृषकों को जागरूक कर ग्रीष्मकालीन धान की तुलना में लाभकारी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। 1 अक्टूबर 2024 से कुल 511 ग्रामों में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों द्वारा शिविर आयोजन किया जा रहा हैं, जिसमें किसान संगवारी के साथ ग्राम पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधि एवं कृषकों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। रबी 2024-25 में कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत राजनांदगांव के मार्गदर्शन में जिले में जल रक्षा मिशन के अंतर्गत किये गये प्रयासों के फलस्वरूप ग्रीष्मकालीन धान के रकबे में 32 प्रतिशत की कमी करने में सफलता मिली है। गत वर्ष जिले में 9336 हे. में क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन धान की फसल ली गई थी। इस वर्ष 6348 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई हुई है, जो गत वर्ष की तुलना में 32 प्रतिशत कम है। ग्रीष्मकालीन धान बदले 2988 हेक्टेयर में फसल विविधीकरण के अंतर्गत मक्का दलहन, तिलहन एवं लघु धान्य जैसी कम जल आवश्यकता वाली फसलों को बोने से इस वर्ष 337.1 करोड़ लीटर सिंचाई जल की बचत का अनुमान है। सिंचाई जल की यह बचत ग्रीष्मकाल में जनसामान्य के पेयजल एवं निस्तारी में आने वाली परेशानियों को काफी हद तक कम करने में सहायक होगा।

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