राजनांदगांव। शिक्षा का अधिकार कानून जिले में मजाक बनकर रह गया है, क्योंकि गरीब बच्चे नि:शुल्क पाने भटक रहे है। प्रायवेट स्कूलों में एक अप्रैल से ऑनलाईन क्लासेस के माध्यम से पढ़ाई आरंभ हो चुका है, लेकिन शिक्षा का अधिकार कानून के अंतर्गत चयनित और प्रवेशित बच्चे प्रायवेट स्कूलों में शिक्षा और प्रवेश पाने विगत छह माह से भटक रहे है। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने बताया कि आरटीई कानून को जिला शिक्षा अधिकार ने मजाक बनाकर रख दिया है, क्योंकि जिले में कई प्रायवेट स्कूलों ने इस सत्र 2020-21 में स्कूल बंद कर दिया है और इसकी जानकारी डीईओ कार्यालय में दिया जा चुका है और इन प्रायवेट स्कूलों में अनेकों बच्चे जो आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित है, उन्हें किसी अन्य स्कूलों में प्रवेश दिया जाना था जो नहीं दिया गया है। इतना ही नहीं कई बच्चे जिनका इस वर्ष आरटीई के अंतर्गत ऑनलाईन लॉटरी के माध्यम से प्रायवेट स्कूलों में चयन हुआ है, ऐसे लगभग 300 बच्चों को प्रायवेट स्कूलों ने प्रवेश नहीं दिया है, उन्हें प्रवेश दिलाने की जिम्मेदारी डीईओ की है, लेकिन वे बच्चे प्रवेश पाने विगत छह माह से भटक रहे है।

श्री पॉल का कहना है कि आरटीई कानून के अंतर्गत प्रवेशित बच्चे और चयनित बच्चों को प्रवेश और शिक्षा दिलाने की समुचित व्यवस्था कराने के संबंध में विगत तीन माह से डीईओ से निवेदन किया जा रहा है, लेकिन गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दिलाने में डीईओ के द्वारा कोई रूचि नहीं दिखाया जा रहा है। कई पीडि़त पालकों ने इस संबंध में डीईओ कार्यालय में लिखित आवेदन भी किया गया है, लेकिन उनके आवेदनों पर भी आज तक कोई कार्यवाही नहीं किया गया। जिले में शिक्षा का अधिकार कानून का समुचित लाभ गरीब बच्चों को नहीं मिल रहा है, इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी समग्र रूप से जिम्मेदार है।

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