मुख्यमंत्री विष्णुदेवसाय और मुख्य सचिव अमिताभ जैन को भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव ने एक्स के माध्यम से ट्वीट करके मध्यप्रदेश शासन पेंशनर कल्याण निधि नियम 1997 में वित्त विभाग छत्तीसगढ़ शासन के संशोधन आदेश दिनांक 24 अगस्त 2006 को निरस्त कर सहायता राशि में तत्काल वृद्धि करने की मांग की है 
जारी संयुक्त विज्ञप्ति मे पेंशनर्स महासंघ के प्रांताध्यक्ष तथा छ ग राज्य संयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन के प्रदेश संयोजक वीरेंद्र नामदेव,भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष  बी के वर्मा, महिला प्रकोष्ठ प्रमुख द्रौपदी यादव , राष्ट्रीय मंत्री आर एन ताटी,कार्यकारी प्रांताध्यक्ष जे पी मिश्रा,महामंत्री अनिल गोल्हानी, प्रदेश संगठन मंत्री टी पी सिंह, कोषाध्यक्ष बी एस दसमेर,प्रदेश के विभिन्न जिले के अध्यक्ष आर जी बोहरे रायपुर, आई सी श्रीवास्तव राजनांदगांव, राकेश जैन बिलासपुर, परमेश्वर स्वर्णकार जांजगीर चांपा, रमेश नंदे जशपुर, अभय शंकर गौराहा रायगढ़, देवनारायण साहू सारंगढ़, एम एल यादव कोरबा, भूपेन्द्र कुमार वर्मा दुर्ग, ओ पी भट्ट कांकेर, आर डी झाड़ी बीजापुर, एस के देहारी नारायणपुर, एस के धातोड़े कोंडागांव, पी एन उड़कुड़े दंतेवाड़ा, एस के कनौजिया सुकमा, प्रेमचंद गुप्ता वैकुंठपुर, माणिक चंद्र अंबिकापुर, महावीर राम बलरामपुर, संतोष ठाकुर सूरजपुर, आर ए शर्मा गौरेला पेंड्रा मरवाही, सतीश उपाध्याय मनेंद्रगढ़, पुरषोत्तम उपाध्याय सक्ती, भैया लाल परिहार मुंगेली, यवन कुमार डिंडोरे बेमेतरा , डी के पाठक, लखन लाल साहू गरियाबंद, रिखीराम साहू महासमुंद आदि ने बताया है कि मध्यप्रदेश शासन में बनाए गए पेंशनर कल्याण निधि नियम 1997 के आधार पर छत्तीसगढ़ राज्य में पेंशनरों को राज्य बनने के 6 साल बाद तक सहायता दी जाती रही. बाद में अगस्त 2006 में वित्त विभाग ने सहायता राशि में संशोधन किया. जिसमें राज्य बाहर इलाज कराने पर 20 हजार को वृद्धि कर 30 हजार और राज्य के भीतर इलाज के लिए 6 हजार को बढ़ाकर 10 हजार किया गया है.जो उस समय से लेकर अब तक कई साल से जारी है. शासन के इस आदेश की जानकारी के अभाव में प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख पेंशनर्स और परिवार पेंशनरों में से एक हजार पेंशनर भी इसका कोई लाभ नहीं ले रहा है.यह सहायता "ऊँट के मुँह में जीरा" वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है.

     पेशनरों के आर्थिक सहायता के लिए जारी इस आदेश से पेंशनर्स अनभिज्ञ रहने के कारण कोई लाभ नहीं उठा पा रहे हैं इससे सम्बन्धित विभागीय अफसर भी अज्ञानता के कारण पूछताछ करने वाले पेंशनरों को जानकारी देने में असमर्थ रहते हैं.इसके बारे में प्रचार प्रसार करने की मांग करते हुए पेंशनर कल्याण निधि नियम 2006 को संशोधन की जरूरत पर बल दिया है.

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