विधानसभा मानसून सत्र के अंतिम दिन धान खरीदी, शॉर्टेज और फर्जीवाड़े का मुद्दा सदन में छाया रहा। कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने बालोद जिले के खरीदी केंद्रों में 184 करोड़ रुपये से अधिक के धान की कमी (शॉर्टेज) का मामला उठाते हुए सरकार और विभाग की जानकारी में विरोधाभास पर सवाल दागे। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सरकार को घेरते हुए पूछा, “50 हजार मीट्रिक टन धान कहां गया?”

सदन में उड़ा डेटा पर भरोसा, वेबसाइट बनाम मंत्री का बयान

संगीता सिन्हा ने सदन में खाद्य विभाग की वेबसाइट और मंत्री की दी गई जानकारी में अंतर को लेकर दस्तावेज लहराते हुए पूछा — “दोनों में से सही कौन है?” मंत्री दयालदास बघेल जवाब देने में असहज दिखे। उन्होंने कहा, “वेबसाइट का डेटा अपडेट होता रहता है।” विधायक ने पलटवार किया — “क्रोड़ों की गड़बड़ी है, गोलमोल जवाब नहीं चलेगा।”

भूपेश बघेल का हमला — “उठाव हो गया तो धान गया कहां?”
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा: “आप खुद कह रहे हैं कि बालोद में 1,000 मीट्रिक टन धान शेष है। फिर 50,000 मीट्रिक टन धान कहां चला गया? नान और एफसीआई को कितना दिया, स्पष्ट करें। अगर उठाव हो गया है, तो स्टॉक कहां गया?”

विधायक संगीता का आरोप — “अंकुरित हो गया धान”
विधायक संगीता सिन्हा ने कहा कि केंद्रों में धान खुले में पड़ा है, और कई जगहों पर अंकुरण आ चुका है। उन्होंने इस बात के फोटो भी सदन में प्रस्तुत किए। मंत्री बघेल ने जवाब दिया कि धान को कैप कवर से ढककर और जल निकासी की व्यवस्था कर सुरक्षित रखा गया है।

स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने हस्तक्षेप करते हुए विधायक से कहा — “आप स्पष्ट कीजिए, आप चाहती क्या हैं?” संगीता ने जवाब दिया — “मैं जांच चाहती हूं, दोषियों पर कार्रवाई हो।”

खरीफ 2024–25 में बालोद में खरीदी और शेष स्टॉक का आंकड़ा:
धान खरीदी: 2,22,500.48 मीट्रिक टन
कुल भंडारण: 2,62,219.36 मीट्रिक टन
24 जून 2025 तक शेष धान: 2,09,961.33 मीट्रिक टन

बिलासपुर के फर्जीवाड़े पर भी उठा सवाल, FIR की जानकारी
विधायक अटल श्रीवास्तव ने बिलासपुर जिले के मस्तूरी और मल्हार खरीदी केंद्रों में फर्जीवाड़े पर सवाल उठाया। मंत्री बघेल ने बताया कि उप पंजीयक के माध्यम से FIR दर्ज कराई गई है और शॉर्टेज की जांच चल रही है। अटल श्रीवास्तव ने पूछा — “10,886 क्विंटल धान की रिकवरी किससे होगी?”

अब सवाल जनता का — जिम्मेदार कौन?
क्या भंडारण में लापरवाही से करोड़ों का नुकसान हुआ?
क्या राशन घोटाले की तरह यह भी एक और बड़ा कृषि घोटाला बनता जा रहा है?
और सबसे अहम — क्या इन गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच होगी या मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा?

धान, छत्तीसगढ़ की रीढ़ है। और अगर उसी में गड़बड़ी हो रही है, तो सदन में सवाल उठना लाज़मी है। अब निगाहें हैं सरकार की कार्रवाई और जवाबदेही पर।

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