Why Childhood Obesity Is Increasing In India: वर्ल्ड ओबेसिटी डे (4 मार्च 2026) के मौके पर जारी एक नई रिपोर्ट ने भारत में बच्चों के हेल्थ को लेकर गंभीर चिंता जताई है. वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन की तरफ जारी वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 के अनुसार, मोटापे और ओवरवेट बच्चों की संख्या के मामले में भारत अब दुनिया में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है. इस सूची में भारत से आगे केवल चीन है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि भारत में बचपन में मोटापे की दर हर साल औसतन लगभग 5 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रही है, जो दुनिया में सबसे तेज बढ़ती दरों में से एक मानी जा रही है.

क्या निकला है रिपोर्ट में?

रिपोर्ट के अनुसार 2025 तक भारत में 5 से 19 साल की उम्र के करीब 4.13 करोड़ बच्चे और किशोर ओवरवेट या मोटापे की कैटेगरी में आ चुके हैं. इनमें लगभग 1.49 करोड़ बच्चे 5 से 9 वर्ष और 2.64 करोड़ किशोर 10 से 19 वर्ष के  शामिल हैं. यह आंकड़े बताते हैं कि मोटापे को रोकने के लिए तय किया गया वैश्विक लक्ष्य 2025 तक पूरा नहीं हो सका है और अब 2030 तक इसे कंट्रोल करना भी चुनौती बनता जा रहा है.

भारत की स्थिति क्यों चिंताजनक?

वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन की सीईओ जोहाना रॉल्स्टन के अनुसार, भारत उन देशों में शामिल है जहां बच्चों में मोटापा सबसे तेजी से बढ़ रहा है और हर साल इसमें करीब 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा रही है. उनका कहना है कि यह स्थिति केवल संयोग नहीं है, बल्कि ऐसे माहौल का परिणाम है जहां बच्चों को स्वस्थ भोजन और पर्याप्त फिजिकल एक्टिविटी के अवसर नहीं मिल पाते. बड़ी जनसंख्या के कारण भारत दुनियाभर की रैंक में दूसरे स्थान पर है, जबकि WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में यह पहले स्थान पर है.  रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अगर यही रफ्तार जारी रही तो 2040 तक युवाओं में कई मेटाबॉलिक बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ सकते है. उदाहरण के तौर पर फैटी लिवर रोग के मामले 8.39 मिलियन से बढ़कर लगभग 11.88 मिलियन तक पहुंच सकते हैं. इसके अलावा हाई ट्राइग्लिसराइड, हाइपरटेंशन और हाइपरग्लाइसीमिय जैसे जोखिम भी बच्चों में तेजी से बढ़ने की आशंका है.

क्यों बढ़ रहे हैं मामले?

वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन की रिपोर्ट में मोटापे के पीछे कई ऐसे कारण बताए गए हैं जिन्हें रोका जा सकता है. सबसे बड़ा कारण बच्चों और किशोरों में फिजिकल एक्टिविटी की कमी है. आंकड़ों के मुताबिक 11 से 17 वर्ष के लगभग 74 प्रतिशत किशोर रोजाना जरूरी फिजिकल एक्टिविटी नहीं कर पाते. इसके अलावा जंक फूड और मीठे पेय पदार्थों का बढ़ता सेवन, स्कूलों में संतुलित भोजन की सीमित उपलब्धता और शुरुआती जीवन में सही पोषण की कमी भी इस समस्या को बढ़ा रही है.

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