आज हम आपको ऐसे गुरु के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके पास खुद आंखें नहीं हैं, फिर भी वे दिव्यांग बच्चों के भविष्य को रोशन कर रहे हैं. यह कहानी है अमित कुमार यादव की, जिन्होंने हार मानने की बजाय अपने अनुभव और ज्ञान से दूसरों की जिंदगी उज्जवल करने की ठानी है.

हमारे हिंदू धर्म में गुरु को भगवान से भी ऊपर रखा गया है. एक बच्चा माटी की तरह होता है, जिसे गुरु अपने ज्ञान और मार्गदर्शन से किसी भी रूप में ढाल सकता है. आज हम आपको एक ऐसे गुरु के बारे में बताने जा रहे हैं. जिनके पास खुद आंखें नहीं है, फिर भी वे बच्चों के भविष्य को रोशन कर रहे हैं. यह कहानी है प्रयागराज के एक राज्य विशिष्ट विद्यालय में पढ़ाने वाले दिव्यांग शिक्षक अमित यादव की. इन्होंने अपना पूरा जीवन दिव्यांग बच्चों को पढ़ने में लगा दिया है. अमित ने कभी अपनी खुली आंखों से पूरी दुनिया देखी थी और सपने भी देखे थे. लेकिन जैसे ही वे 8 साल के हुए तो उनकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे जाने लगी और एक समय ऐसा आया जब वे पूरी तरह अंधे हो गए. बचपन में मिले इस सदमे को वह आज भी भूल नहीं पाए. अपने जीवन में जो कष्ट उन्होंने झेले, वे नहीं चाहते कि वहीं कष्ट कोई और दिव्यांग बचा उठाए इसलिए अमित दिव्यांग बच्चों के टीचर बन गए.

कौन हैं अमित कुमार यादव?

अमित कुमार यादव उत्तर प्रदेश के महाराजगंज के रहने वाले वाले है. इनके पिता पेशे से किसान हैं और उनके दो भाई दो बहन भी हैं. बचपन के जीवन में इनका सब कुछ सही सलामत था. लेकिन धीरे-धीरे उनकी आंख की रोशनी जाने की वजह से अपने जीवन के रंगीन सपनों को अपनी आंखों से उतरता हुआ देखा. उस दौरान उनको समाज की कई बातों का भी सामना करना पड़ा. इन सब के बीच अमित यादव ने अपनी हिम्मत नहीं हारी और बचपन से पढ़ाई को जारी रखा.

पहले आठवीं फिर हाई स्कूल फिर इंटरमीडिएट की परीक्षा पास किया. उसके बाद हिंदी और इतिहास से ग्रेजुएशन कंप्लीट किया. फिर मास्टर डिग्री प्राप्त किया. इसी पढ़ाई के दौरान  एसबीआई बैंक में जॉब का मौका भी मिला . लेकिन इन्होंने अपनी नौकरी इसलिए छोड़ दी कि इन्होंने बचपन में ब्लाइंड होने के बाद जो अवहेलना झेला वह अब अपने जैसे ब्लाइंड बच्चों को उस अवहेलना से गुजरने देना नहीं चाहते थे. इसलिए अमित यादव बैंक की नौकरी छोड़ कर प्रयागराज के राज्य विशिष्ट विद्यालय की में शिक्षक हो गए. इस विद्यालय में पढ़ने वाला अधिकतर बच्चा दिव्यांग है. ये बच्चे सुन तो सकते हैं लेकिन देख नहीं सकते. आंखों से ना देखने का दर्द अमित यादव झेल चुके थे. इसलिए अपने जैसे दिव्यांग बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं. अब हर बच्चे में जीवन में कुछ बनने की और उनको अपने पैर पर कैसे खड़ा होना बच्चों को पढ़कर समझते भी हैं.

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930