नई दिल्ली । ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय थलसेना की यह पहली आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस कल जैसलमेर में आयोजित की जा रही है। यह कॉन्फ्रेंस रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसका आयोजन Jaisalmer में किया जा रहा हैं जो की अंतरराष्ट्रीय सीमा (India-Pakistan Border) के बेहद करीब है। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हिस्सा लेंगे और सेना के आर्मी कमांडर्स को संबोधित करेंगे। इस दौरान आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी सहित सभी सातों कमांड्स के आर्मी कमांडर्स मौजूद रहेंगे।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद की तैयारियों पर फोकस,इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य एजेंडा ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना की ऑपरेशनल रेडीनेस, आधुनिकीकरण, और भविष्य की रणनीति पर केंद्रित रहेगा। इसमें दो मोर्चों (Two-Front War) पर एक साथ कार्रवाई की क्षमता, नई बटालियनों जैसे भैरो और अश्नी बटालियन, तथा ड्रोन, मिसाइल और इन्फैंट्री मॉडर्नाइजेशन पर भी चर्चा होगी।

जैसलमेर की यह आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक सोच और भविष्य की सैन्य दिशा को तय करने वाला मंच साबित होगी। यह सम्मेलन स्पष्ट संदेश देता है कि भारतीय सेना हर परिस्थिति में तैयार है, चाहे वह सीमाओं की रक्षा हो या देश की गरिमा की सुरक्षा।

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