बॉलीवुड में कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शकों के जेहन में बने रहते हैं। इमरान हाशमी का शिवम पंडित भी उन्हीं किरदारों में शामिल है। ‘आवारापन’ में शिवम की खामोशी, उसकी आंखों में छिपा दर्द और भीतर सुलगता गुस्सा किरदार को खास बना गया था। इमरान ने उस भूमिका को जिस संजीदगी के साथ निभाया था, उसकी छाप आज भी अलग नजर आती है। लगभग दो दशक बाद ‘आवारापन 2’ में इमरान हाशमी एक बार फिर शिवम के रूप में दिखाई देते हैं। इस बार कहानी का दायरा पहले से बड़ा है। चाइल्ड ट्रैफिकिंग, संगठित अपराध, बदले की भावना, रिश्तों की उलझन और भावनात्मक संघर्ष को एक साथ कहानी में पिरोया गया है। नितिन कक्कड़ के निर्देशन में बनी फिल्म पुराने किरदार को सिर्फ दोहराने के बजाय उसके सफर को आगे ले जाने की कोशिश करती है।
कैसी है फिल्म की कहानी?
शिवम की जिंदगी में आलिया की याद आज भी उतनी ही गहरी है। वो अपने अतीत से बाहर नहीं निकल पाया है। इसी दौरान एक दिन उसे आलिया की कब्र के पास एक छोटी बच्ची मिलती है। शिवम उसे अनाथालय पहुंचाता है और धीरे-धीरे उससे भावनात्मक रूप से जुड़ जाता है। वह बच्ची का नाम भी आलिया रख देता है।
कुछ समय बाद एक दंपती बच्ची को गोद ले लेता है। शिवम को भरोसा होता है कि बच्ची अब सुरक्षित हाथों में है और उसे परिवार के साथ बेहतर जिंदगी मिल सकेगी। लेकिन उसकी यह खुशी ज्यादा देर नहीं टिकती। उसे मालूम पड़ता है कि बच्ची को गोद लेने वाला कपल एक बड़े अंतरराष्ट्रीय चाइल्ड ट्रैफिकिंग नेटवर्क का हिस्सा है।
जैसे ही आलिया के गायब होने की खबर सामने आती है, शिवम को उस दुनिया में दोबारा उतरना पड़ता है, जिससे वह खुद को लंबे समय से अलग रखने की कोशिश कर रहा था। लेकिन इस बार लड़ाई सिर्फ एक बच्ची को वापस लाने की नहीं है। उसके सामने अपने पुराने जख्म, अपराधबोध और अधूरे अतीत का सामना करने की चुनौती भी है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
‘आवारापन’ की सबसे बड़ी ताकत शिवम की निजी भावनाएं और उसका आंतरिक संघर्ष थीं। सीक्वल उस भावनात्मक दुनिया को बरकरार रखते हुए कहानी को बड़े अपराध तंत्र तक ले जाता है। चाइल्ड ट्रैफिकिंग के साथ ड्रग्स, ऑर्गनाइज्ड क्राइम, बदला और कुर्बानी जैसे पहलुओं को भी कहानी में जगह दी गई है।
पहली फिल्म की तुलना में यहां एक्शन और क्राइम का हिस्सा ज्यादा दिखाई देता है। फिल्म का ट्रीटमेंट भी ज्यादा कमर्शियल है। हालांकि, इस बड़े कैनवास के बीच शिवम का व्यक्तिगत संघर्ष कहीं गायब नहीं होता। वह लगातार अपने अतीत के साथ लड़ता हुआ दिखाई देता है और उसके फैसलों के पीछे पुरानी तकलीफों की छाया बनी रहती है।
शिवम बनकर फिर छाए इमरान हाशमी
शिवम पंडित का किरदार इमरान हाशमी की यादगार भूमिकाओं में गिना जाता है और दूसरी फिल्म में भी वो इस किरदार की आत्मा को बरकरार रखते हैं। खास बात यह है कि उनके अभिनय में जरूरत से ज्यादा नाटकीयता नहीं है। चेहरे के भाव, चुप्पी और डायलॉग बोलने के अंदाज से वह शिवम के भीतर चल रहे संघर्ष को सामने लाते हैं।
इमरान के साथ दिशा पाटनी जारा के किरदार में नजर आती हैं। जारा की जिंदगी भी अपराध की उस दुनिया से उलझी हुई है, जिससे उसका परिवार जुड़ा है। वहीं पुरन गब्बी जोरावर की भूमिका निभाते हैं, जिसका संबंध ड्रग्स के कारोबार से है। इन किरदारों के जरिए कहानी को सिर्फ शिवम का निजी सफर तक सीमित नहीं रखा गया है।
सपोर्टिंग कलाकारों का भी मिला साथ
दिशा पाटनी अपने किरदार में इमोशनल पहलू जोड़ती हैं। जारा की परिस्थितियां उसे एक जटिल स्थिति में खड़ा करती हैं और अभिनेत्री उस बेचैनी को पर्दे पर लाने की कोशिश करती हैं। पुरन गब्बी का जोरावर भी कहानी में अस्थिरता और तनाव बढ़ाता है।
शबाना आजमी नफीसा के किरदार में कहानी को गंभीरता देती हैं। इसके अलावा सुविंदर विक्की जयदीप, विजयंत कोहली महमूद, अतुल कुमार समर्थ और अनिरुद्ध रावल सिकंदर के रोल में दिखाई देते हैं। इन किरदारों के कारण फिल्म का जांच-पड़ताल और अपराध वाला हिस्सा ज्यादा विस्तृत होता है।
फिल्म का निर्देशन और लेखन
नितिन कक्कड़ ने शिवम की कहानी को इस बार बड़े स्तर पर प्रस्तुत करने की कोशिश की है। फिल्म में इमोशनल ड्रामा के साथ एक्शन और क्राइम को संतुलित करने का प्रयास दिखाई देता है। बिलाल सिद्दीकी की लेखनी कहानी को कई नए मोड़ देती है और शिवम के सफर को पुराने अध्याय से आगे ले जाती है।
इमरान हाशमी और विशेष फिल्म्स का दोबारा साथ आना भी फिल्म के लिए खास पहलू है। यह वापसी केवल नॉस्टेल्जिया पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि पुराने किरदार को नई परिस्थितियों में रखकर उसकी कहानी को आगे बढ़ाने का प्रयास करती है।
म्यूजिक बना पुरानी फिल्म से कनेक्शन
‘आवारापन 2’ के संगीत में पहली फिल्म की यादों को फिर से जगाने की कोशिश साफ सुनाई देती है। मिथुन, अमाल मलिक और जीत गांगुली ने संगीत तैयार किया है, जबकि सईद कादरी और रश्मि विराग ने गीत लिखे हैं।
मिथुन ने ‘तेरा मेरा रिश्ता’ और ‘तो फिर आओ’ को नए अंदाज में पेश किया है। वहीं अरिजीत सिंह की आवाज में ‘ये आवारापन’ शिवम की भावनात्मक यात्रा को और गहराई देता है। अच्छी बात यह है कि गाने केवल पिछली फिल्म की याद दिलाने के लिए इस्तेमाल नहीं किए गए, बल्कि कहानी के इमोशनल मोमेंट्स के साथ जुड़ते हैं।
फिल्म देखें या फिर नहीं?
कुल मिलाकर, ‘आवारापन 2’ सिर्फ पहली फिल्म की लोकप्रियता और यादों पर सवार होकर आगे बढ़ने वाली फिल्म नहीं लगती। कहानी इस बार बड़े स्तर पर है, अपराध का स्तर ज्यादा गंभीर है और एक्शन भी पहले के मुकाबले ज्यादा है। इसके बावजूद फिल्म की असली जान शिवम पंडित का भावनात्मक सफर ही बना रहता है।
इमरान हाशमी की वापसी फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। दिशा पाटनी और पुरन गब्बी अपने-अपने किरदारों में कहानी को आगे बढ़ाते हैं, जबकि सपोर्टिंग कास्ट इसे अतिरिक्त गहराई देती है। अगर आप इमोशन्स और रोमांस को एक्शन के साथ एक बार फिर फील करना चाहते हैं तो ये फिल्म देखने के लिए जा सकते हैं।



















