राजधानी पुलिस के लिए वांछित अमित बघेल की ओर से देशभर में दर्ज एफआइआर को निरस्त कराने के लिए दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार के साथ रद कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में किसी भी तरह की राहत नहीं दी जा सकती और याचिकाकर्ता को अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए था। अमित बघेल पर क्षेत्रवाद और सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने वाले भड़काऊ व आपत्तिजनक बयानों के कई मामले दर्ज हैं। झूलेलाल, महराज अग्रसेन और दीनदयाल उपाध्याय जैसे व्यक्तित्व के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी से कई समाजों में रोष फैला था। इसी के चलते छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में एफआइआर दर्ज कराई गई। याचिकाकर्ता की ओर से अर्नब गोस्वामी प्रकरण का हवाला दिया गया, जिस पर राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता रवि शर्मा ने तर्क देते हुए कहा कि यह मामला बीएनएस के दायरे में आता है और इस आधार पर राहत संभव नहीं।
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