जमीनों की सरकारी गाइडलाइन दरों में परिवर्तन के बाद जमीनों की खरीदी-बिक्री व रजिस्ट्री में ब्रेक जैसी स्थति निर्मित हो गई है। सप्ताह के दूसरे दिन मंगलवार को भी प्रदेश के रजिस्ट्री दफ्तरों में रजिस्ट्री 30 से 40 प्रतिशत ही रही। वजह यह है कि जमीनों की सरकारी कीमतें और बाजार की कीमतों में अब बहुत बड़ा अंतर आ चुका है। वहीं, बड़े भू-भाग की खरीदी में हेक्टेयर-वर्गमीटर की गणना ने भी बाजार में उथल-पुथल मचा दिया है।
अब कई स्थानों रप स्थिति यह है कि जहां जमीनों की कीमत के बराबर रजिस्ट्री की दर आ चुकी है, क्योंकि ऐसे स्थानों पर बाजार भाव कम है, लेकिन सरकारी गाइडलाइन सात से लेकर दस गुणा महंगी हो चुकी है। पूरी स्थिति पर गौर करें तो जमीनों की गणना में सरकार उलझ चुकी है। वहीं, रियल एस्टेट डवलपर्स ने इसे रियल एस्टेट के लिए बड़ा संकट बताया है। बिल्डरों का कहना है सरकारी गाइडलाइन दरों के आने के बाद रजिस्ट्री की संख्या कम हो चुकी है। जमीनों के मूल्यांकन में कई क्षेत्रों में 10 गृुणा तक वृद्धि की गई है, जबकि बाजार की कीमतें इससे काफी कम है, लेकिन सरकारी कीमतें बढ़ने से रजिस्ट्री महंगी हो चुकी है।
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