भारत अब रेयर अर्थ मेटल्स के मामले में चीन के वर्चस्व को चुनौती देगा। केंद्र सरकार ने चीन की रेयर अर्थ एक्सपोर्ट पाबंदियों के बीच बड़ा कदम उठाते हुए 7,280 करोड़ रूपए की रेयर अर्थ मैग्रेट मैन्युफैक्यरिंग स्कीम को हरी झंडी दिखाई हैं। इस योजना के तहत देश में पहली बार आने वाले 7 वर्षो में रेयर अर्थ की खोज की जाएगी। योजना का लक्ष्य रेयर अर्थ इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने के साथ हाई-टेक्रोलॉजी एप्लीकेशन में देश की क्षमताओं को बढ़ाना हैं। यह फैसला बुधवार को कैबिनेट की बैठक में लिया। केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी दी। उन्होनें बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में 19919 करोड़ रूपए की चार बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी मिली। इनमें रेयर अर्थ परमानेंट मैग्रेट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम सबसे प्रमुख रही। मौजूदा समय में ग्लोबल रेयर अर्थ मैग्रेट सप्लाई चेन पर चीन का वर्चस्व हैं। इस योजना का लक्ष्य 6000 टन प्रति वर्ष की उत्पादन क्षमता तैयार करना हैं। इससे ऑटोमोटिव, रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्रों के लिए सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी।

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