राजधानी के शंकर नगर एक्सप्रेस-वे पर बुधवार की देर रात लगभग 10 बजे एक के बाद एक तीन भीषण दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें आठ से ज्यादा गाडिय़ा आपस में टकरा गईं। रफ्तार और लापरवाही के कारण एक्सप्रेस-वे को कुछ देर के लिए मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया। इस हादसे में लग्जरी कारों से लेकर बाइक और भारी वाहन तक चपेट में आएं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जिस एक्सप्रेस-वे पर ऑटो और ई-रिक्शा जैसी धीमी गति वाले वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है, वहां न केवल एक आटो घुसा, बल्कि उसने गलत दिशा से फर्राटा भरने कोशिश की जो अंतत: इस बड़े हादसे का कारण बनी। जानकारी के अनुसार बुधवार शाम को एक्सप्रेस-वे पर तेलीबांधा चौक पर एक दुघर्टना के कारण वाहनों की कतार लंबी थी। तभी एक आटो चालक ने जाम में फंसने के बजाय नियमों को ताक पर रखते हुए आटो को गलत दिशा में मोड़ दिया। सामने से तेज रफ्तार में आ रहीं गाडिय़ां जब अचानक अपने सामने आटो को आते हुए देखी तो ड्राइवरों ने इमरजेंसी बे्रक लगाए। एक्सप्रेस-वे पर गाडिय़ां अमूमन 60से 80 की रफ्तार में होती हैं। जैसे ही पहली गाड़ी ने बे्रक मारा, पीछे चल रही गाडिय़ा एक-दुसरे से टकराती चली गईं। देखते ही देखते वहां आठ गाडिय़ा क्षतिग्रस्त हो गईं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि गाडिय़ों के बोनट पिचक गए और कांच सडक़ पर बिखर गए।
घायलों को अस्पताल भेजने के बजाय सीमा विवाद में उलझी रही पुलिस:- जहां घायलों को तुरंत मदद की जरूरत थी, वही पुलिस अपनी सीमा विवाद में उलझी नजर आई। घटना की सूचना मिलते ही खम्हारडीह थाना और सिविल लाइन थाना, दोनों की पेट्रोलिंग टीमें मौके पर पहुंची। लेकिन राहत कार्य शुरू करने और घायलों की सुध लेने के बजाय पुलिसकर्मी यह तय करने में जुट गए कि हादसा किस थाने के इलाके में हुआ है। दरअसल इस ब्रिज का एक हिस्सा खम्हारडीह थाना क्षेत्र में आता है और दूसरा सिविल लाइन में जब नईदुनिया की टीम ने पुलिस अधिकारियों से घटना का ब्योरा लेने की कोशिश की तो दोनों थानों की पुलिस ने अनभिज्ञता जताई और जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टालते रहे।
अंधेरे में डुबा एक्सप्रेस-वे, एक भी कैमरा नहीं:- हादसे के बाद भीड़ ने प्रशासन की एक और बड़ी लापरवाही उजागर की। लोगों ने बताया कि करोड़ों की लागत से बने इस एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा के नाम पर एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा है। हादसे के बाद यह पता लगा पाना मुश्किल हो रहा है कि असल जिम्मेदार कौन था। अगर कैमरे होते तो रांग साइड आने वाले आटो का नंबर तुरंत ट्रेस हो जाता। साथ ही लाइटिंग की व्यवस्था भी लचर है।
रफ्तार की कहर: रायपुर एक्सप्रेस-वे में टकराए आठ से ज्यादा वाहन
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