उदयपुर। अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर प्रदेशभर में विरोध के स्वर तेज हो गए है। अरावली बचाओ अभियान के तहत उदयपुर, जोधपुर, सीकर सहित कई जिलों में सोमवार को लोगों ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। उदयपुर में कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पुलिस से झड़प हो गई। बेस्ट कंटेंट लिखकर दीजिए

उदयपुर में आज कांग्रेस, करनी सेना कार्यकर्ता सहित कई संगठनों के लोग कलक्ट्रेट पर अरावली बचाने के लिए एकजुट हुए। तभी कांग्रेस जिला अध्यक्ष फतेह सिंह राठौड़ की पुलिस कर्मियों से बहस हो गई। जिस पर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। यहां पुलिस ने कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है।

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को वापस लिया जाए। वरना उग्र प्रदर्शन किया जाएगा। लोगों का कहना है कि अरावली को केवल ऊंचाई के आधार पर परिभाषित करना वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टि से उचित नहीं। यह भी कहा कि यदि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को संरक्षित नहीं किया गया तो उससे सटी ऊंची पहाड़ियों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है, जिससे पूरी पर्वतमाला के क्षरण की स्थिति बन सकती है।

अरावली कोई साधारण पहाड़ नहीं है. यह चंबल, साबरमती और लूणी जैसी नदियों का प्रमुख स्रोत है. थार रेगिस्तान को पूर्व की ओर बढ़ने से रोकता है. वहीं दिल्ली-NCR के लिए ग्रीन लंग्स यानी इंसानी फेफड़ों की तरह काम करता है. 650 किलोमीटर में फैला, करीब 2 अरब साल पुराना पर्वत तंत्र है. पर्यावरण कार्यकर्ता नीलम आहूजा, जो पिछले 12 सालों से People for Aravallis के जरिए संघर्ष कर रही हैं. इस मसले पर उनका कहना है कि अगर अरावली हट गई, तो उत्तर-पश्चिम भारत रेगिस्तान बन जाएगा. इसका सीधा असर पानी, भोजन और लाखों लोगों की ज़िंदगी पर पड़ेगा.

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