मुंबई : 29 नगर निगमों में वोटिंग से पहले महाराष्ट्र जिला परिषद चुनाव में महायुति ने 288 में से 215 सीटें जीतकर महाविकास अघाड़ी को बैकफुट पर धकेल दिया है। महाविकास अघाड़ी यानी एमवीए सिर्फ 51 सीटों पर सिमट गई। इतनी जिला परिषदों में अकेले महायुति के पार्टनर एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने कब्जा किया। 129 जिला परिषदों में जीतने वाली बीजेपी के लिए यह चुनाव काफी फायदेमंद रहा। शहर की पार्टी मानी जाने वाली बीजेपी गांव और अर्ध शहरी इलाकों तक पहुंच गई। विधानसभा चुनाव के बाद दूसरी बार एकनाथ शिंदे 51 परिषद क्षेत्र जीतकर अपने प्रतिद्वंद्वी उद्धव ठाकरे पर भारी रहे। अजित पवार भी बारामती समेत पूरे प्रदेश में 35 सीटें जीतकर चाचा शरद पवार से 20 साबित हुए।
फडणवीस ने शिंदे और अजित के खिलाफ कुछ नहीं कहा
जिला पंचायत और जिला परिषद चुनाव में बीजेपी की रणनीति कामयाब हुई। इस चुनाव में सीएम देवेंद्र फडणवीस ने 38 जनसभा की, मगर शिंदे और पवार से मतभेदों को कभी उजागर नहीं किया। इससे भी अधिक बीजेपी ने चुनाव से पहले ऐसा जाल बिछाया, जिसमें विपक्ष भी फंस गया। विधानसभा चुनाव के बाद से देवेंद्र फडणवीस ने निकाय चुनाव अलग-अलग लड़ने की वकालत शुरू कर दी। एकनाथ शिंदे और अजित पवार भी अलग-अलग चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गए। स्थानीय स्तर पर नए गठबंधन बनाए गए। श्रीवर्धन में एनसीपी के खिलाफ शिंदे सेना ने कांग्रेस और ठाकरे गुट से हाथ मिला लिया। 9 दिसंबर तक गठबंधन को लेकर भ्रम बना रहा।
नामांकन के बाद शिवसेना-एनसीपी से किया गठबंधन
एमवीए में शामिल शिवसेना यूबीटी, एनसीपी-एसपी और कांग्रेस भी चुनावी माहौल देखकर अलग-अलग चुनाव लड़ने मैदान में उतर गई। उद्धव ठाकरे की अपील के बाद भी कांग्रेस अलग चुनाव लड़ने की स्टैंड पर कायम रही। 15 तारीख को पहले फेज की वोटिंग से पहले बीजेपी-शिवसेना और एनसीपी ने नई चाल चल दी। तीनों पार्टियों ने गठबंधन का ऐलान कर दिया। साथ ही, जिन सीटों पर सहमति नहीं बनी, वहां फ्रेंडली फाइट के लिए तैयार हो गए। कोंकण के रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग समेत कई सीटों पर महायुति के बीच फ्रेंडली फाइट हुई। इन इलाकों में बीजेपी ने विपक्ष की जगह पर अपने सहयोगियों को ही खड़ा कर दिया।
कई सीटों पर फ्रेंडली फाइट कर एमवीए को उलझाया
अहमद पुर में बीजेपी वर्सेज एनसीपी (अजित पवार) हो गया। शिंदखेड़ा में एनसीपी के अजित गुट के सामने बीजेपी आ गई। मुरगुड में एनसीपी को शिंदे सेना ने चैलेंज किया। नासिक के त्र्यंबकेश्वर में भी शिंदे सेना ने बीजेपी को हराया। नांदेड़ में बीजेपी के 6 कैंडिडेंट्स को अजित पवार की एनसीपी ने दी मात दी। बीजेपी की रणनीति के कारण अलग-अलग चुनाव लड़ रही अघाड़ी के वोटर ऐसे कन्फ्यूजन वाले माहौल में ताकतवर प्रत्याशी की ओर मुड़ गए। जब 21 दिसंबर को फाइनल रिजल्ट आया तो महाविकास अघाड़ी औंधे मुंह गिर गई। कांग्रेस ने दलित मुस्लिम वोट बैंक के बूते 35 जिला परिषदों में जीत हासिल की। शिवसेना यूबीटी और एनसीपी एसपी महायुति के उम्मीदवारों के सामने टिक नहीं सके।














