रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ा एक्शन लिया है. ईडी ने कोर्ट में एक और सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की है, जिसमें घोटाले की परत-दर-परत कहानी सामने रखी गई है. इस नई चार्जशीट ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है.

कौन था घोटाले का मास्टरमाइंड?

ईडी ने अपनी सप्लीमेंट्री कंप्लेंट में सौम्या चौरसिया को पूरे शराब घोटाले का कोऑर्डिनेटर बताया है. एजेंसी के अनुसार, घोटाले की पूरी योजना, नेटवर्क और पैसे के प्रवाह को मैनेज करने में उनकी केंद्रीय भूमिका रही. वहीं, ईडी ने पूर्व मंत्री कवासी लखमा और चैतन्य बघेल को इस पूरे घोटाले का पॉलिटिकल एग्जीक्यूटिव करार दिया है. यानी राजनीतिक संरक्षण और फैसलों के जरिए सिस्टम को अपने पक्ष में मोड़ा गया.

2883 करोड़ का खेल, 4 साल तक चला घोटाला

ईडी के मुताबिक, यह शराब घोटाला 2019 से 2023 के बीच अंजाम दिया गया और इसमें कुल 2883 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई. यह रकम राज्य के इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में से एक मानी जा रही है.

अवैध कमाई के चार बड़े रास्ते

ईडी ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट में अवैध कमाई के चार तरीके साफ तौर पर बताए हैं

अवैध कमीशन – शराब सप्लाई और ठेकों में मोटा कमीशन

बिना हिसाब की शराब बिक्री –ऑफ रिकॉर्ड शराब बेचकर काली कमाई

कार्टेल कमीशन – ठेकेदारों और सप्लायर्स का सिंडिकेट

नया लाइसेंस मॉडल – नियम बदलकर अवैध लाभ

ईडी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में नेता, वरिष्ठ नौकरशाह और कारोबारी शामिल रहे.

382 करोड़ की संपत्ति अटैच

जांच के दौरान ईडी ने अब तक 382 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति अटैच कर ली है. इसमें नकद, अचल संपत्तियां और अन्य निवेश शामिल हैं. एजेंसी का कहना है कि आगे जांच बढ़ने पर यह आंकड़ा और बढ़ सकता है. नई सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट के बाद अब कोर्ट की कार्यवाही तेज होने की संभावना है. इस केस ने साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सिस्टमेटिक और राजनीतिक स्तर का घोटाला है.

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