अयोध्या: महाराष्ट्र के मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने उत्तर प्रदेश और बिहार से आए लोगों को लेकर तीखी टिप्पणी की और हिंदी भाषा को महाराष्ट्र पर थोपने का विरोध किया. उन्होंने कहा कि यूपी-बिहार के लोग समझ लें कि हिंदी महाराष्ट्र की भाषा नहीं है और अगर इसे जबरन थोपा गया, तो वह इसका कड़ा विरोध करेंगे. उन्होंने कहा कि अगर कोई हिंदी का इस्तेमाल करेगा, तो वे उसको लात मारेंगे. अब इस पूरे मामले पर अयोध्या के लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

अयोध्या के साधु-संत और स्थानीय लोगों ने बताया कि राज ठाकरे को ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए. पूरे देश में हिंदी भाषा बोली जाती है. जबरदस्ती किसी भी भाषा को नहीं बुलवाया जा सकता है. राज ठाकरे का यह बयान बेहद ही निंदनीय है और उनको माफी मांगनी चाहिए. साधु संतों ने कहा कि अगर राज ठाकरे ऐसा करेंगे, तो फिर महाराष्ट्र के लोगों के साथ भी ऐसा किया जाएगा.

महाराष्ट्र के लोगों को घुसने नहीं देंगे
अयोध्या के स्थानीय पंकज गुप्ता ने बताया कि राज ठाकरे ने जो कहा है, यह बहुत ही गलत है. अंग्रेजी भाषा अगर आपको बिजनेस देता है, तो हिंदी संस्कार देता है. इस तरह राज ठाकरे को नहीं कहना चाहिए, यह संविधान के खिलाफ है. बहुत से मराठी उत्तर प्रदेश और बिहार आते हैं, मठ मंदिरों में दर्शन पूजन करते हैं. हम लोग उनका सम्मान करते हैं. पंकज ने कहा कि महाराष्ट्र में जो बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग निवास कर रहे हैं, वह लोग मराठी नहीं बोल रहे हैं, तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं है. वह लोग हिंदी भाषा का प्रयोग करते हैं, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. अगर महाराष्ट्र में यूपी और बिहार के लोगों के साथ कुछ भी हुआ, तो उत्तर प्रदेश और बिहार में हम लोग महाराष्ट्र के लोगों को घुसने नहीं देंगे. उनको उसी तरह जवाब दिया जाएगा.

किसी के अराजकता से नहीं, संविधान से चलता है देश
स्थानीय संत सीताराम दास ने बताया कि मनसे से प्रमुख राज ठाकरे जिहादी प्रवृत्ति के होते जा रहे हैं, हमारे संविधान में भी है. संस्कृत और हिंदी भाषा बोलना अनिवार्य है. जो हिंदी का विरोध करेगा, वह हिंदुस्तान का विरोध करेगा. अगर राज ठाकरे महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के लोगों के साथ कोई भी कार्य करते हैं, तो उनके साथ भी वैसा भी कार्य किया जाएगा. ऐसी मानसिकता रखने वाले लोगों को भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं है. यह देश संविधान से चलता है, किसी के अराजकता से नहीं चलता है.

‘महाराष्ट्र, हिंदुस्तान से अलग नहीं’
जगतगुरु परमहंस आचार्य ने बताया कि राज ठाकरे का जो बयान है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने लिखा है कि राष्ट्रभाषा संस्कृत है, लेकिन हिंदी भी राष्ट्रभाषा होनी चाहिए. राज ठाकरे ने जो कहा है, वह अच्छा नहीं कहा है. महाराष्ट्र में यूपी और बिहार के लोगों को कोई अपशब्द बोलेगा, तो उसी की भाषा में जवाब दिया जाएगा. स्थानीय विकास गुप्ता ने कहा कि यह हिंदुस्तान है, यहां पर हिंदी ही चलेगी. महाराष्ट्र कोई हिंदुस्तान से अलग नहीं है. राज ठाकरे ने जो कहा है, वह गलत कहा है. अगर महाराष्ट्र में कोई हिंदी नहीं बोलेगा, तो क्या वहां उर्दू में बोलेगा. राज ठाकरे का यह बयान बिल्कुल गलत है.

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