राजस्थान – साइबर ठगी पर लगाम लगाने के लिए स्पेशल टीम गठित कर कार्रवाई की जा रही है. लेकिन साइबर ठग नए-नए तरीके से वारदातों को अंजाम दे रहे हैं. ऐसे में पुलिस साइबर ठगों तक पहुंच तो रही है, लेकिन वारदात होने के बाद. ऐसा ही मामला सामने आया है जोधपुर से, जहां साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच बासनी थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जिसमें सिम डीलर ने फिंगर स्कैन के बहाने एक मजदूर के नाम से दूसरी सिम उठाकर आगे बेच दी. उसी सिम का इस्तेमाल कर लाखों रुपए की साइबर ठगी को अंजाम दिया गया. जब पुलिस जांच करते हुए सिम के वास्तविक नामधारी तक पहुंची, तो पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ. पुलिस ने आरोपी सिम डीलर को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ में कई राज सामने आ रहे हैं. 

बासनी थाना सीआई नितिन दवे के अनुसार गिरफ्तार सिम डीलर को सोमवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे चार दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है. पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया है कि वह फिंगर स्कैन और केवाईसी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल कर सिम उठाने का काम करता था. पुलिस को आशंका है कि यह एक संगठित गिरोह का हिस्सा हो सकता है, जो साइबर ठगी के लिए बड़ी संख्या में सिम उपलब्ध कराता है. 

साइबर ठगी की जांच में खुला मामला

पुलिस कमिश्नर कार्यालय की विशेष टीम ने हाल ही में एक साइबर ठगी प्रकरण की जांच कर रही थी. इस दौरान एक मोबाइल नंबर संदिग्ध रूप से सामने आया. जांच करने पर यह नंबर सांगरिया इलाके में रहने वाले वेल्डिंग वर्कर मुराद खान के नाम पर दर्ज मिला. पुलिस जब मुराद तक पहुंची और उसे बताया कि उसके नाम की सिम से लाखों रुपए की ठगी हुई है, तो वह हैरान रह गया. 

न खाते में लेन-देन और न सिम का इस्तेमाल

पुलिस जांच में सामने आया कि मुराद के बैंक खाते या अन्य किसी वित्तीय माध्यम से कोई लेन-देन नहीं हुआ था. मुराद ने पुलिस को स्पष्ट रूप से बताया कि जिस नंबर से ठगी हुई है, वह सिम उसने कभी इस्तेमाल ही नहीं की है. इसके बाद मुराद ने पूरे मामले को लेकर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई. मुराद ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 18 फरवरी 2024 को उसकी पुरानी सिम में नेटवर्क की समस्या आ रही थी. इस पर वह सांगरिया पुलिस चौकी के पास सिम बेचने वाले एक डीलर के पास गया, जिसने अपना नाम प्रकाश भील बताया. डीलर ने उसकी सिम को दूसरी कंपनी में पोर्ट करवाया और एक नई सिम दी. इसी दौरान डीलर ने यह कहकर फोटो और फिंगर प्रिंट दोबारा स्कैन करवाए कि पहली बार स्कैन सही नहीं हुआ है. 

फिंगर स्कैन के बहाने उठा ली दूसरी सिम

डीलर ने दोबारा स्कैन करवाने के दौरान एक अलग सिम अपने पास रख ली. बाद में उसी सिम का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया गया. मुराद को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि उसके नाम पर जारी सिम किसी और के हाथों में पहुंच चुकी है. पुलिस को आशंका है कि आरोपी डीलर अकेला नहीं है, बल्कि उसके पीछे सिम उठाने और आगे सप्लाई करने वाला एक बड़ा गिरोह सक्रिय है. इन सिमों का इस्तेमाल देशभर में साइबर ठगी के लिए किया जा रहा है. पुलिस अब आरोपी से पूछताछ के आधार पर अन्य सिम डीलरों और ठगी करने वालों की कड़ी जोड़ने में जुटी है.

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