नई दिल्ली: भारत और जर्मनी के बीच नई पीढ़ी के पारंपरिक पनडुब्बियों को बनाने के लिए करीब 10 बिलियन डॉलर की बड़ी डील हो सकती है। दोनों देश इसके लिए तैयार भी हैं। जर्मनी ने इस बड़े रक्षा समझौते के लिए तब हाथ मिलाया है, जब पाकिस्तान भी पहले ही इस तरह की पनडुब्बियों की खरीद के लिए अपनी इच्छा जता चुका है। ऐसे में भारत के लिए यह डील बड़ी कामयाबी हो सकती है।
भारत और जर्मनी में बातचीत हो चुकी है पूरी
भारत मार्च के अंत तक अगली पीढ़ी की पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण के लिए कई अरब डॉलर के सौदे पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है। जर्मनी के साथ दीर्घकालिक समर्थन और निर्यात संबंधी मंजूरी के लिए अंतर-सरकारी समझौता (IGA) को अंतिम रूप दे दिया गया है और मझगांव डॉकयार्ड्स लिमिटेड (MDL) के साथ लागत बातचीत पूरी हो चुकी है।
पनडुब्बी डील के लिए मार्च में आएंगे जर्मन रक्षा मंत्री
सूत्रों ने बताया कि IGA को हाल ही में अंतिम रूप दिया गया है और अंतिम हस्ताक्षर के लिए जर्मन रक्षा मंत्री के मार्च के अंत तक भारत आने की उम्मीद है। मुख्य अनुबंध MDL और रक्षा मंत्रालय के बीच हस्ताक्षरित किया जाएगा, जबकि IGA प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, कर्मियों के प्रशिक्षण और प्रशासनिक मंजूरी के लिए व्यापक आश्वासन प्रदान करेगा।
10 अरब डॉलर की हो सकती है ये बिग डील
एमडीएल और जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (टीकेएमएस) की साझेदारी में बोली को जनवरी 2025 में बोली प्रक्रिया की समीक्षा करने वाली तकनीकी निगरानी समिति द्वारा मंजूरी दे दी गई थी। पिछले एक साल में लागत और तकनीकी विवरणों को अंतिम रूप देने का काम किया गया, जिसमें एमडीएल ने अग्रणी भूमिका निभाई।
हालांकि, अनुबंध की अंतिम कीमत अभी तक घोषित नहीं की गई है, लेकिन यह लगभग 10 अरब डॉलर होने की संभावना है, जिसमें महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शामिल होगा और भारत में एक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर हजारों रोजगार सृजित किए जाएंगे।
6 पनडुब्बियां बनाई जाएंगी, तकनीकी ट्रांसफर करेगा जर्मनी
इतनी बड़ी परियोजना को देखते हुए छह पनडुब्बियों का निर्माण भारत में हाई लेवल के तकनीकी ट्रांसफर के साथ किया जाना है। करार पर हस्ताक्षर के लगभग सात साल बाद पहली पनडुब्बी के सेवा में आने की उम्मीद है। नई पनडुब्बियों की एक प्रमुख क्षमता एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) प्रणाली होगी, जो उन्हें दो सप्ताह तक पानी के भीतर रहने की क्षमता प्रदान करेगी। इससे उनकी पानी में छिपकर काम करने की क्षमता में काफी वृद्धि होगी।














