अहमदाबाद/वडोदरा: गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 63 साल में पहली बार भगवान बुद्ध से जुड़े अवशेषों को एमएस यूनवर्सिटी से बाहर निकालते हुए उन्हें श्रीलंका के लिए रवाना किया। इन अवशेषों को 14 जनवरी, 1963 को खोजे जाने के बाद महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में रखा गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले साल श्रीलंका के बाद भारत ने वहां प्रदर्शनी में भेजने का फैसला किया था। इसी के तहत मंगलवार को एक कार्यक्रम में सीएम भूपेंद्र पटेल ने इन्हें रवाना किया। इस मौके पर गायकवाड़ परिवार से राजमाता शुभागिंनी राजे गायकवाड़ भी मौजूद रहीं। महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी गुजरात का प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय है।
कोलंबो की प्रदर्शनी में रखे जाएंगे अवशेष
श्रीलंका में भगवान बुद्ध के अवशेषों 4 से 10 फरवरी 2026 तक सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शित किया जाएगा। कोलंबो में प्रदर्शनी के बाद यह अवशेष भारत वापस आ जाएंगे। भारत के इस कदम से दोनों देशों के बीच कटूनीतिक संबंधों के साथ आध्यामिक संबंध भी मजबूत होंगे। भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी को श्रीलंका भेजना सांस्कृतिक कूटनीति का एक कदम है। राज्य सरकार के अनुसार गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी कोलंबो के गंगारामया मंदिर में 04-11 फरवरी, 2026 तक आयोजित की जाएगी।
भावुक हो गया थे दलाई लामा
भगवान बुद्ध से जुड़े ये अवशेष बेशकीमती हैं। इन अवशेषों को भारतीय वायु सेना के विमान से कोलंबो ले जाया जाएगा और इनके साथ गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी, भिक्षुओं और वरिष्ठ अधिकारियों का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी होगा। महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी के पुरातत्व विभाग की एक टीम भी इन अवशेषों के साथ जाएगी। एमएसयू के रजिस्ट्रार के एम चुडासमा ने कहा कि इन्हें आखिरी बार 2010 में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए रखा गया था। तब राज्य सरकार ने शहर में एक अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन आयोजित किया था। सम्मेलन के मुख्य अतिथि दलाई लामा अवशेषों को देखकर भावुक हो गए थे। गौरतलब हो कि श्रीलंका में इन अवशेषों की यात्रा और प्रदर्शन पिछले साल अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा के दौरान व्यक्त की गई आध्यात्मिक पहुंच और सांस्कृतिक कूटनीति का एक प्रतीक है।
गुजरात में कहां पर मिले ये अवशेष?
भगवान बुद्ध के यह अवशेष अरावल्ली जिले के शामलाजी के पास स्थित देवनी मोरी पुरातात्विक स्थल पर पाए गए थे। देवनी मोरी में खुदाई 1957 में एमएसयू के पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर एस एन चौधरी के नेतृत्व में एक टीम द्वारा शुरू की गई थी। तब यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता जंगली जानवरों से खुद को बचाने के लिए बंदूकों से लैस होकर टेंट में रहते थे। 14 जनवरी 1963 को उन्हें एक छोटा सा ताबूत मिला और उस पर ब्राह्मी लिपि में ‘दशबल शरीर निलयः’ लिखा हुआ मिला। इसका मतलब था कि यह दशबल (बुद्ध) के अवशेषों का निवास स्थान है। यह ताबूत एक स्तूप के अंदर आधार से 24 फीट की ऊंचाई पर मिला था। इसमें एक तांबे का डिब्बा है, जिसमें पवित्र राख, रेशमी कपड़ा और मोतियों के साथ ऑर्गेनिक पदार्थ हैं। अब इन अवशेषों को एक एयर-टाइट डेसिकेटर में रखा गया है।














