अहमदाबाद: गुजरात में बीजेपी के पांच विधायकों के ‘लेटर कांड’ के बाद सरकार का बड़ा फैसला सामने आया है। गृह विभाग ने राज्य के बड़े शहरों को छोड़कर सभी जिलों में आईजी और एसपी के बीच में ‘तीसरी आंख’ बैठा दी है। इन्हें ‘पुलिस प्रभारी अधिकारी’ कहा जा सकता है। राज्य सरकार के गृह विभाग ने मुख्यालय में विभिन्न जिम्मेदारियों को संभाल रहे एडीजीपी, आईजी और डीआईपी रैंक के अफसरों को जिले अलॉट कर दिए हैं। इन असफरों को महीने में दो विजिट करने का आदेश दिया गया है। इन विजिट में ये ऑफिसर्स हर प्रकार की समस्याओं को सुनेंगे और फिर फॉलोअप भी लेंगे। अफसर अपने दौरे का पहले ऐलान करेंगे और हर दौरे में नए थाने में पहुंचेंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा थाने कवर किए जा सकें। ऑफिसर्स दौरे के बाद अपनी रिपोर्ट डीजीपी और गृह विभाग को भेजेंगे।

हर्ष संघवी के दखल पर नई व्यवस्था
सूत्रों की मानें तो इंचार्ज डीजीपी का चार्ज संभालने के बाद 1992 बैच के आईपीएस डॉ. के एल एन राव की पिछले दिनों गृह विभाग संभाल रहे उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के साथ एक बेहद अहम बैठक हुई थी। इसमें कई बड़े फैसले लिए गए। गौरतलब हो कि वडोदरा बीजेपी के विधायकों ने यह आक्षेप लगाया था कि अधिकारी सुनते हैं। वे जनता के कामों पर ध्यान नहीं देते हैं। सूत्रों की मानें तो लोगों की फरियाद नहीं सुनने की कुछ शिकायतें व्यक्तिगत तौर हर्ष संघवी को मिलीं थी। उन्होंने इसका जिक्र राज्य स्तरीय क्राइम कांफ्रेंस में किया था। तब से गृह विभाग इस दिशा में काम कर रहा था। गुजरात के पुलिस तंत्र में यह व्यवस्था पहली बार लागू की गई है।

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