मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता पुलकित सम्राट अपने करियर की शुरुआत टीवी से नहीं करना चाहते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि डेली सोप्स ज्यादातर मेलोड्रामा तक ही सीमित रहते हैं। भारतीय टेलीविजऩ में ओवरनाइट सक्सेस बहुत कम लोगों को मिलती है और उन्हीं बेहद कम लोगों में एक नाम पुलकित सम्राट का भी शामिल है। एक साधारण से टीवी ऑडिशन, जिसे उन्होंने थोड़ी हिचकिचाहट के साथ स्वीकार किया था, वहीं आगे चलकर न सिर्फ उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ, बल्कि उसी ने उन्हें हर घर का चहेता चेहरा भी बना दिया। खुद को वर्सेटाइल एक्टर के तौर पर देखने वाले पुलकित सम्राट अपने करियर की शुरुआत टीवी से नहीं करना चाहते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि डेली सोप्स ज़्यादातर मेलोड्रामा तक ही सीमित रहते हैं, लेकिन शायद किस्मत को कुछ और मंजूर था और उसी ने उन्हें लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचा दिया।
पुलकित सम्राट ने कहा कि मुझे याद है मैंने साफ कहा था कि मैं टीवी सीरियल टाइप का काम नहीं करना चाहता, बल्कि मैं कुछ अलग और वर्सेटाइल करना चाहता था, लेकिन फिर कास्टिंग टीम ने मुझे समझाया कि यह किरदार बाकी टीवी रोल्स से अलग है। इसमें गहराई के साथ कुछ नया करने का मौका था और सबसे अहम बात यह थी कि मुझे एकता कपूर से मिलने का अवसर मिलने वाला था। इसी बात ने मुझे मुंबई आने के लिए राज़ी कर लिया और मैं रातों-रात दिल्ली से मुंबई आ गया। गौरतलब है कि एकता कपूर पहले ही पुलकित की तस्वीरें देख चुकी थीं और उनसे मुलाकात के बाद वे निश्चिंत हो चुकी थी कि उनके सीरियल क्योंकि सास भी कभी बहू थी के लक्ष्य वीरानी वही होंगे। ऐसे में मुंबई आते ही उनकी ग्रूमिंग शुरू हुई। उन्हें नया हेयरकट दिया गया और स्क्रीन टेस्ट कराया गया और फुटेज देखते ही उनके नाम पर मुहर लगाते हुए एकता कपूर ने कहा कि ओके, डन। रेडी। हालांकि इस बड़ी सफलता के बीच भी पुलकित को रह-रहकर अपना परिवार याद आ रहा था, जिन्हें वे बिना बताए दिल्ली छोडक़र मुंबई चले आए थे। उनसे मिलने की तड़प और अपनी कामयाबी की खबर देने के लिए उन्होंने पीठ दर्द का बहाना बनाते हुए एक रात के लिए दिल्ली लौटने की इजाज़त मांगी और पहुंच गए अपने पैरेंट्स से मिलने। दिल्ली एयरपोर्ट पर अपने पैरेंट्स को देखते ही वे भावुक हो उठे। उस घटना को याद करते हुए पुलकित ने बताया कि आंखों में आंसू लिए मैं उनके गले लगा। शब्द बहुत काम थे, बस थी तो भावनाएं। हालांकि कुछ ही घंटों बाद मैं फिर से मुंबई लौट आया लेकिन इस बार एक नए आत्मविश्वास और बदली हुई ज़िंदगी के साथ लौटा था। क्योंकि सास भी कभी बहू थी में पुलकित की एंट्री बेहद खास रही थी।














