कोलकाता : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल में 100 करोड़ रुपये की नई संपत्तियां कुर्क की हैं। मामला कथित अवैध खनन और कोयला चोरी के मामले में धनशोधन से जुड़ा है। ईडी का दावा है कि इस मामले में स्थानीय प्रशासन ने सक्रिय रूप से सहयोग किया था। इस मामले में हालिया तलाशी जनवरी में कई परिसर में ली गई थी, जिनमें कोलकाता स्थित राजनीतिक परामर्श कंपनी ‘आई-पैक’ और उसके एक निदेशक प्रतीक जैन से जुड़े परिसर भी शामिल थे।

आठ जनवरी की इस कार्रवाई को लेकर काफी विवाद खड़ा हो गया था। ईडी ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी छापेमारी के दौरान जैन के आवास पर पहुंच गईं। वह ‘महत्वपूर्ण सबूत साथ लेकर चली गईं’। उन्होंनें आई-पैक के कार्यालय में भी यही काम किया।


ममता बनर्जी का आरोप

ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया था कि ईडी इन तलाशी की आड़ में राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले आई-पैक के परिसर से पार्टी की चुनाव रणनीति से संबंधित दस्तावेज ले जाने की कोशिश कर रही है।

चल-अचल संपत्ति कुर्क

ईडी ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा कि इस मामले से जुड़ी ‘लाभार्थी’ कंपनियों (शाकंभरी इस्पात एंड पावर लिमिटेड और गगन फेरोटेक लिमिटेड) की अचल संपत्तियों, सावधि जमा और म्यूचुअल फंड को जब्त करने के लिए धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक अंतरिम आदेश जारी किया गया है।

स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं है कंपनी

अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक दीपक कुमार अग्रवाल के नेतृत्व वाला शाकंभरी समूह पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े एकीकृत इस्पात निर्माताओं में से एक है। यह समूह कई स्पंज आयरन, इस्पात और बिजली इकाइयों का संचालन करता है और ‘थर्मोकॉन’ और ‘एलिगेंट’ जैसे ब्रांड के तहत उत्पादों का विपणन करता है। शाकंभरी समूह की कोई भी कंपनी किसी भी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं है।

अब तक 322.71 करोड़ जब्त

ईडी ने बताया कि जब्त की गई संपत्तियों का कुल मूल्य 100.44 करोड़ रुपये है। ईडी ने कहा कि नवीनतम आदेश के साथ अब तक जब्त की गई संपत्तियों का कुल मूल्य 322.71 करोड़ रुपये हो गया है और इस मामले में अपराध से अर्जित आय 2,742 करोड़ रुपये है। ईडी ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के पट्टे वाले क्षेत्रों में अवैध रूप से कोयले के खनन और बड़े पैमाने पर कोयला चोरी में शामिल एक कथित गिरोह की जांच कर रही है।

अनूप माजी है सरगना

स्थानीय प्रशासन की सक्रिय सहायता से ‘अवैध रूप से’ खनन करके निकाले गए कोयले को पश्चिम बंगाल की विभिन्न फैक्टरियों में वितरित किया जाता था। कुछ साल पहले ईडी द्वारा गिरफ्तार किए गए अनूप माजी उर्फ लाला को इस गिरोह का सरगना बताया जा रहा है।

ईडी का दावा है कि अनूप माजी ने एक अवैध परिवहन चालान या पैड की शुरुआत की। इसे आमतौर पर ‘लाला पैड’ के नाम से जाना जाता है। यह अवैध परिवहन चालान एक कर चालान के रूप में काम करता था, जो अस्तित्वहीन कंपनियों के नाम पर जारी किया जाता था।

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