एजेंसियां—लखनऊ, कांग्रेस समेत अन्य दलों को छोडक़र भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने वाले नेताओं को अब सीधे संगठन में जिम्मेदारी नहीं मिलेगी। पार्टी ने तय किया है कि ऐसे नेताओं को पहले ‘सनातन प्रशिक्षण’ से गुजरना होगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ही उन्हें पार्टी की मुख्यधारा में सक्रिय भूमिका दी जाएगी। भाजपा सूत्रों के अनुसार इस प्रशिक्षण में पार्टी की रीति-नीति, कार्य संस्कृति, हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की विचारधारा से विस्तार से अवगत कराया जाएगा। उद्देश्य यह है कि अन्य दलों से आए नेता संगठन की विचारधारा को आत्मसात कर सकें और चुनावी रणनीति में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस व अन्य दलों से बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हुए थे। पार्टी का दावा था कि ऐसे नेताओं की संख्या 20 हजार से अधिक रही। अब भाजपा इन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव में विपक्ष के खिलाफ एक मजबूत राजनीतिक आधार के रूप में तैयार करना चाहती है। पार्टी की रणनीति है कि इन नेताओं के माध्यम से कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं को भाजपा से जोड़ा जाए और संगठन का दायरा बूथ स्तर तक मजबूत किया जाए। संगठन के सूत्रों के मुताबिक अन्य दलों से आए नेताओं के लिए प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रदेश से लेकर ब्लॉक स्तर तक के नेता और कार्यकर्ता शामिल होंगे। भाजपा ने 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारियां तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। भाजपा के एक प्रदेश महामंत्री के अनुसार अन्य दलों से आए नेताओं को पार्टी के सिद्धांतों और विचारधारा के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा 2027 का चुनाव हिंदुत्व के मुद्दों पर फोकस करते हुए लड़ सकती है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने हिंदुत्व आधारित मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। आगामी चुनाव में भी वैचारिक मुद्दों को केंद्र में रखकर रणनीति बनाई जा रही है। भाजपा संगठनात्मक मजबूती और वैचारिक एकरूपता के साथ 2027 के चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।














