इंदौर के भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान चौंकाने वाली बात सामने आई है. इस दौरान पता चला है कि एएसआई सर्वे रिपोर्ट पहले ही ली हो चुकी है. जिसके चलते उसे पहले ही ओपन कर लिया गया है.
हाईकोर्ट में बताया गया है कि सभी पक्षकारों को पहले ही रिपोर्ट मिल चुकी है. वहीं हाईकोर्ट ने सर्वे रिपोर्ट पर 2 हफ्ते में दावे, आपत्ति और सुझाव देने के लिए समय दिया है. हाई कोर्ट ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया.
भोजशाला मामले में ASI सर्वे रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
- मंदिर का मूल ढांचा: रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वर्तमान संरचना एक पहले से मौजूद मंदिर के अवशेषों पर बनाई गई है. यह मंदिर 11वीं-12वीं शताब्दी का बताया गया है.
- हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां: सर्वे के दौरान परिसर से 97 ऐसी कलाकृतियां और मूर्तियां मिली हैं जो हिंदू धर्म से संबंधित हैं. इनमें गणेश, ब्रह्मा, शिव, हनुमान और कृष्ण की खंडित मूर्तियां शामिल हैं.
- संस्कृत के शिलालेख: दीवारों और खंभों पर बड़ी संख्या में संस्कृत और प्राकृत भाषा के शिलालेख मिले हैं. इनमें राजा भोज के समय की काव्य रचनाएं और व्याकरण के सूत्र मौजूद हैं.
- मराठा काल के अवशेष: रिपोर्ट में उल्लेख है कि कुछ संरचनाओं और मूर्तियों पर मराठा काल के प्रभाव भी देखे गए हैं, जो इसके निरंतर उपयोग को दर्शाते हैं.
- इस्लामी संरचनाओं का निर्माण: ASI ने पाया कि मस्जिद के निर्माण में मंदिर के ही स्तंभों (Pillars) और पत्थरों का उपयोग किया गया था. कई स्तंभों पर हिंदू प्रतीकों को मिटाने की कोशिश की गई है.
- सरस्वती की प्रतिमा का संदर्भ: रिपोर्ट में उस स्थान की पहचान की गई है जहाँ मूल रूप से वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा स्थापित रही होगी. हालांकि, वर्तमान में वह प्रतिमा लंदन के संग्रहालय में है.
- वैज्ञानिक तकनीक (GPR): ‘ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार’ सर्वे में ज़मीन के नीचे दबी हुई दीवारों और कमरों का पता चला है, जो मूल मंदिर के आधार (Foundation) का हिस्सा हैं.
- वास्तुकला की शैली: खंभों पर उकेरी गई घंटियां, कमल के फूल, और ‘कीर्तिमुख’ (हिंदू वास्तुकला का एक प्रतीक) स्पष्ट रूप से मंदिर निर्माण शैली (परमार कालीन) की पुष्टि करते हैं.
- नक्काशी के साथ छेड़छाड़: रिपोर्ट में दर्ज किया गया है कि कई जगहों पर पुरानी नक्काशी को ढंकने के लिए प्लास्टर का इस्तेमाल किया गया था, जिसे हटाने पर नीचे हिंदू कलाकृतियां दिखाई दीं.
- समय का निर्धारण: कार्बन डेटिंग और पुरातात्विक विश्लेषण के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि यह स्थल राजा भोज (1000-1055 ईस्वी) के काल में एक महान शिक्षण केंद्र और मंदिर था.
इस मामले पर 16 मार्च को हाईकोर्ट में फिर से सुनवाई होगी. कोर्ट में रिपोर्ट ओपन होने के बाद, अब हिंदू और मुस्लिम पक्ष इन वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर अपनी दलीलें पेश करेंगे. यह रिपोर्ट इस विवाद के कानूनी समाधान के लिए सबसे बड़ा आधार बनेगी.














