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छत्तीसगढ़ लंबे समय से देश की इकोनॉमी का पावर इंजन है। बिजली, कोयला, सीमेंट, एल्युमिनियम समेत अनेक बेशकीमती संसाधनों से यह राज्य देश के अर्थतंत्र को गति देता है। यह बात और है कि इसकी क्षमता और संभावनाओं को नक्सलवाद ने काफी धुमिल करने का प्रयास भी किया है। अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अथक प्रयासों से माओवाद अंतिम सांस ले रहा है तो छत्तीसगढ़ ने विकास के पथ पर अपनी गति बढ़ा ली है। वह दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ की गिनती देश के विकसित राज्यों में होगी। इसकी बानगी और तैयारी छत्तीसगढ़ सरकार की विभिन्न नीतिगत पहल के साथ ही हालही में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण और बजट 2026-27 में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है। 24 फरवरी को जब राज्य के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने 1 लाख 72 हजार करोड़ का बजट पेश किया तो निश्चित रूप से देश के अर्थशास्त्रियों की नजर छत्तीसगढ़ पर पड़ी होंगी, जो बहुत ही खामोशी से लेकिन संतुलित गति से समावेशी विकास की ओर कदम बढ़ा रहा है। अव्वल तो, छत्तीसगढ़ जनकल्याणकारी राज्य के रूप अपनी सफल भूमिका का निर्वहन करते हुए कृषक उन्नति योजना (10,000 करोड़ रुपये), महतारी वंदन योजना (8,200 करोड़ रुपये), धान खरीदी (6 हजार करोड़ रुपये) ऊर्जा सब्सिडी (6,700 करोड़ रुपये), मुख्यमंत्री खाद्यान सहायता योजना (6500 करोड़ रुपये), विकसित भारत जी राम जी (4,000 करोड़ रुपये) प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (4 हजार करोड़ रुपये) जैसे बड़े बजटीय आवंटन कर अंत्योदय की अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता को साकार किया है। साय सरकार ने जिस चरण पादुका योजना को दोबारा शुरू किया उसका बजट 60 करोड़ रूपए तय किया गया है। इसी तरह तेंदूपत्ता पारिश्रमिक हेतु 204 करोड़ रूपए का प्रावधान सराहनीय मानवीय पहल है।

आस्था पथ (शक्ति पीठ भ्रमण) योजना के 5 करोड़ रुपये आवंटित कर सरकार ने अपने कोर वोटर को यह संकेत भी दिया है कि वह सनातन मूल्यों व संस्कृति से जुड़े कार्यों में हमेशा तत्पर रहेगी। इसी क्रम में श्रीरामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना से अब तक 42 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीरामलला का दर्शन कराया गया है। इस योजना के लिए बजट में 36 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।

किसी भी राज्य के विकास को टिकाऊ बनाने के लिए कुछ दीर्घकालिक योजनाएं एवं तैयारी करनी पड़ी है। छत्तीसगढ़ ने गत वर्ष मोर विजन डॉक्यूमेंट 2047 बनाकर देश भर की राज्य सरकारों और लोक नीति विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। अपने कार्यकाल के तीसरे वर्ष में भी साय सरकार ने प्रदेश के विकास को लेकर दीर्घकालिक और ठोस निर्णय लेने में जरा भी संकोच नहीं किया, मौजूदा बजट के कई प्रावधान इसकी बानगी हैं। उदाहरण के लिए आज शहरी नियोजन एक बड़ी चुनौती है। रोजगार एवं आजीविका के साथ शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य के लिए जिस तरह शहरीकरण बढ़ रहा है हमें भविष्य की आवश्यकता के अनुरूप शहरों में बुनियादी योजनाएं पहुंचानी होगी। इस चुनौती के समाधान के लिए मुख्यमंत्री आदर्श शहर समृद्धि योजना शुरू की जा रही है, जिसके लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, इतनी ही राशि मुख्यमंत्री द्रुतगामी सड़क संपर्क योजना के लिए आवंटित कर साय सरकार ने ग्रामीण और शहरी विकास को एक समान वरीयता दी है।

प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दंतेवाड़ा में कलेक्टर रहते हुए एजुकेशन सिटी की स्थापना कर देश को एक नई राह दिखाई, उसे वह अब अबूझमाड़ और जगरगुंडा में भी मूर्त रूप देने जा रहे हैं। इसके लिए 100 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान कर उन्होंने बता दिया है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अगुआई वाली सरकार के लिए बस्तर का विकास पहली प्राथमिकता है। 23 नवीन औद्योगिक पार्क एवं भूमि विकास बैंक के लिए 200 करोड़ रुपये प्रदान किया गया है, इसका लाभ निश्चित रूप से एमएसएमई को मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं सरगुजा क्षेत्र से आते हैं, वह पिछले दो साल में सौ बार से अधिक बस्तर का दौरा कर चुके हैं। ऐसे में बस्तर और सरगुजा को लेकर उनकी प्राथमिकता का आकलन किया जा सकता है। इस बजट में बस्तर और सरगुजा में खाद्य, कृषि और उससे संबद्ध उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सौ करोड़ रुपये की एकमुश्त राशि का प्रावधान यहां के उद्योगों के लिए नये अवसर लेकर आएगा।

छत्तीसगढ़ को एआई का नया हब बनाने के लिए मुख्यमंत्री एआई मिशन शुरू किया जाएगा। राज्य सरकार ने सेमीकण्डक्टर कारखाना और एआई डाटा सेंटर पार्क के लिए भूमि आवंटित कर इस ओर किए जा रहे प्रयासों को गति दी है। रायपुर देश के व्यवस्ततम एयरपोर्ट में एक है। यहां कार्गो की सुविधा होने से सेंट्रल इंडिया में छत्तीसगढ़ को विशेष लाभ मिल रहा है। बिलासपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर एयरपोर्ट को विकसित करने के लिए मौजूदा बजट में 80 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। सीजी वायु योजना के तहत एयर लाईन्स 30 करोड़ रूपए की मदद वायबिलिटी गैप के रूप में दी जाएगी। इससे एविएशन इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी।

आज का छत्तीसगढ़ उद्योग से अधिक सर्विस सेक्टर में आगे बढ़ रहा है। सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी एसजीडीपी में बढ़कर 46.59 प्रतिशत हो गई है। यानी कृषि और खनिज क्षेत्र से अपनी पहचान स्थापित करने वाला छत्तीसगढ़ अब परिवहन, होटल इंडस्ट्री, पर्यटन और हाउसिंग जैसे सेक्टर में भी तेजी से अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। सेवा क्षेत्र के महत्व को पहचाने हुए साय सरकार ने होम स्टे नीति के लिए 10 करोड़ रुपये प्रदान किए हैं। पांच प्रमुख एयरपोर्ट पर हैंडीक्राफ्ट शो-रूम स्थापित होंगे। धुड़मारास को यूएन द्वारा ग्लोबल टूरिस्ट विलेज की लिस्ट में शामिल किए जाने से छत्तीसगढ़ में पर्यटन से जुड़ी संभावनाओं को और बल मिला है, यही वजह है कि मैनपाट पर्यटन तथा सिरपुर विकास योजना को लेकर कुछ विशेष प्रोत्साहन दिए गए हैं।

धर्मेन्द्र द्विवेदी, वरिष्ठ पत्रकार

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