Black Clothes in Wedding: भारतीय परंपरा में काले रंग को लेकर अलग-अलग मान्यताएं रही हैं. पहले जहां शुभ कार्यों में काले रंग से परहेज किया जाता था, वहीं आजकल शादियों में काले कपड़े पहनने का चलन बढ़ गया है. खासकर रिसेप्शन, संगीत या कॉकटेल जैसे कार्यक्रमों में लोग काले परिधान पसंद करते हैं. आइए समझते हैं कि इसका धर्म और संस्कृति से क्या संबंध है.
काला रंग और धार्मिक मान्यताएं
हिंदू धर्म में काला रंग पूरी तरह अशुभ नहीं माना जाता. दरअसल, काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला भी माना गया है. शनि देव को काला रंग प्रिय है और उनकी पूजा में काले वस्त्र, तिल या उड़द चढ़ाए जाते हैं. माना जाता है कि काला रंग बुरी नजर से बचाता है. इसी वजह से बच्चों को काला टीका भी लगाया जाता है.
इस दृष्टि से देखें तो शादी जैसे बड़े और शुभ अवसर पर काला रंग नजर दोष से सुरक्षा का प्रतीक भी बन सकता है.
आधुनिक शादियों में बदलती सोच
आजकल शादियां केवल पारंपरिक रस्मों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि फैशन और स्टाइल का भी बड़ा हिस्सा बन चुकी हैं. रिसेप्शन या शाम के कार्यक्रमों में काला रंग शाही और आकर्षक लुक देता है. धर्म में भी समय के साथ बदलाव को स्वीकार करने की परंपरा रही है, इसलिए लोग मुख्य वैवाहिक संस्कार (जैसे फेरे) में पारंपरिक रंग पहनते हैं, लेकिन अन्य कार्यक्रमों में काले कपड़े पहन लेते हैं.
काला रंग: शक्ति और गंभीरता का प्रतीक
धार्मिक दृष्टि से काला रंग शक्ति, स्थिरता और गहराई का प्रतीक भी माना जाता है. मां काली का स्वरूप भी शक्ति और संरक्षण का प्रतीक है. इससे यह समझ आता है कि काला रंग केवल अशुभ नहीं, बल्कि ऊर्जा और सामर्थ्य से भी जुड़ा है. शादी जैसे नए जीवन की शुरुआत के अवसर पर यह रंग आत्मविश्वास और मजबूती का संकेत दे सकता है.
सामाजिक और व्यावहारिक कारण
काला रंग हर रंग के साथ आसानी से मेल खा जाता है और पहनने वाले को आकर्षक दिखाता है. यह रंग औपचारिक अवसरों के लिए उपयुक्त माना जाता है. साथ ही, शाम के कार्यक्रमों में यह ज्यादा निखरकर सामने आता है.
शादियों में काला रंग पहनना पूरी तरह से गलत या अशुभ नहीं है. यह व्यक्ति की आस्था, परंपरा और परिवार की मान्यताओं पर निर्भर करता है. आज के समय में लोग धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए भी फैशन को अपनाते हैं. इसलिए काला रंग अब शादी समारोहों में स्टाइल और आत्मविश्वास का प्रतीक बनता जा रहा है.














