नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के चलते दुनिया के कई देशों पर कच्चे तेल का संकट का मंडरा रहा है। इसमें भारत भी शामिल है। हमारे पास 25 दिन का स्टॉक (India Crude Oil Stock) बचा हुआ है। इस तेल संकट के बीच एक बार फिर से भारत के सबसे पुराने दोस्त रूस ने मदद का हाथ बढ़ाया है।
भारत का लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल आयात होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग चोकपॉइंट्स में से एक है। भारत के कई जहाज इस समय मिडिल ईस्ट में फंसे हैं। ऐसी स्थिति में रूस के साथ आने से भारत को तेल संकट से निपटने में मदद मिल सकती है।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस मीडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष को से जुड़ी दिक्कतों को कम करने के लिए भारत को क्रूड ऑयल की सप्लाई बदलने के लिए तैयार है। उधर दूसरी ओर ईरान ने चीन के लिए होर्मुज स्ट्रेट खोल दिया है। यानी चीन जाने वाले जहाज के लिए ईरान ने समंदर का रास्ता खोला है।
तेल संकट से निपटने के लिए भारत की मदद के लिए रूस तैयार
रूसी अधिकारियों ने मंगलवार को रॉयटर्स को बताया कि अगर खाड़ी से शिपमेंट में दिक्कतें बढ़ती हैं, तो मॉस्को एनर्जी सप्लाई में भारत की मदद करने के लिए तैयार है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 9.5 मिलियन बैरल रूसी क्रूड वर्तमान में भारतीय जलक्षेत्र के पास जहाजों पर है, जो आवश्यकता पड़ने पर कुछ हफ्तों के भीतर रिफाइनरियों तक पहुंच सकता है।
ईरान पर US-इजरायली (Iran US Conflict) हमलों से कच्चे तेल में तेजी देखने को मिली है। वैश्विक तेल बाजारों में गुरुवार को उछाल देखा गया। WTI क्रूड फ्यूचर्स गुरुवार को 3% से ज्यादा बढ़कर लगभग $77 प्रति बैरल हो गए, जिससे इस हफ्ते की बढ़त और बढ़ गई। US और ईरान के बीच जंग और तेज हो सकती है। क्योंकि एक US सबमरीन ने श्रीलंका के तट पर एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया।
चीन के लिए ईरान ने खोला होर्मुज स्ट्रेट
इस सप्ताह होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रते हुए एक बल्क कैरियर ने इशारा किया कि वह चीन का है। इससे पता चलता है कि मिडिल ईस्ट में युद्ध के दौरान जहाज कैसे पानी के रास्ते से सुरक्षित रास्ता पक्का करने की कोशिश कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग और केप्लर के शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, आयरन मेडेन ने गुरुवार सुबह अपने डेस्टिनेशन सिग्नल को “फॉर ऑर्डर्स” से बदलकर “चाइना ओनर” कर दिया, क्योंकि यह ओमानी कोस्टलाइन के पास से गुज़रते हुए रास्ते से गुजरा। केप्लर के डेटा से पता चलता है कि यह जहाज दिसंबर से फारस की खाड़ी में कई शिपमेंट डिलीवर कर रहा था।














