Rajasthan News: राजस्थान के जयपुर में एक घटना हुई है, जिसमें एक जिला जज की पत्नी की ट्रेन में टॉयलेट जाने के बाद रहस्यमय तरीके से मौत हो गई. जज राजकुमार चौहान की पोस्टिंग चित्तौड़गढ़ जिले की अतिरिक्त अदालत में है. उनकी पत्नी का नाम उषा चौहान था.
दंपति होली के त्योहार के बाद कल कांचीगुडा-भगत की कोठी एक्सप्रेस ट्रेन से जोधपुर से निम्बाहेड़ा लौट रहे थे. दोनों एक ही ट्रेन में यात्रा कर रहे थे, लेकिन उन्हें अलग-अलग डिब्बे मिले. इस स्थिति में ट्रेन के निम्बाहेड़ा रेलवे स्टेशन पहुंचने से ठीक पहले उषा ने राजकुमार को फोन किया. उसने कहा कि वह टॉयलेट जाकर रेलवे स्टेशन पर उतर जाएगी.
इसके बाद ट्रेन निम्बाहेड़ा स्टेशन पहुंची. जज राजकुमार ट्रेन से उतरे और अपनी पत्नी उषा के आने का इंतजार करते हुए कुर्सी पर बैठ गए. लेकिन काफी देर तक उनकी पत्नी नहीं आई. राजकुमार घबरा गए क्योंकि उन्होंने फोन पर संपर्क करने की कोशिश की लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. उन्होंने तुरंत निम्बाहेड़ा स्टेशन पर रेलवे पुलिस से संपर्क किया और उन्हें घटना के बारे में बताया.
राजकुमार की पत्नी उषा की गहन तलाश की
पुलिस ने उनसे उषा चौहान के बारे में सभी विवरण मांगे. उन्होंने तुरंत संबंधित ट्रेन के आने पर निम्बाहेड़ा स्टेशन पर सीसीटीवी फुटेज की जांच की. इसमें पता चला कि उषा उस रेलवे स्टेशन पर नहीं उतरी थी. पुलिस ने अनुमान लगाया कि उसे ट्रेन में ही होना चाहिए, लेकिन कांचीगुडा-भगत की कोठी एक्सप्रेस ट्रेन मंदसौर स्टेशन के करीब पहुंच रही थी. पुलिस ने तुरंत संबंधित रेलवे स्टेशन से संपर्क किया और उन्हें मामले के बारे में बताया. जब ट्रेन मंदसौर स्टेशन पहुंची तो वे अंदर गए और राजकुमार की पत्नी उषा की गहन तलाश की. सीट पर केवल उसके कपड़े थे और उषा का पता नहीं चला.
टॉयलेट में बेहोश मिली उषा
पुलिस ने टॉयलेट में दस्तक दी. अंदर से दरवाजा बंद था और कोई आवाज नहीं आ रही थी. इसलिए पुलिस ने टॉयलेट का दरवाजा तोड़ने का फैसला किया. जब ट्रेन रतलाम जिले के जोरा स्टेशन पर पहुंची तो उसे कुछ देर के लिए रोक दिया गया. पुलिस ने टॉयलेट का दरवाजा तोड़ा और अंदर देखा तो उषा चौहान बेहोश पाई गई. उसे पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उषा की पहले ही मौत हो चुकी है.
यह सुनकर जज राजकुमार सदमे में आ गए. बताया गया है कि उषा को दिल का दौरा पड़ा था. इसके बाद राजकुमार ने अपनी पत्नी का पोस्टमार्टम नहीं करने का अनुरोध किया, जिसके बाद कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए शव को परिवार को सौंप दिया गया.














