Moradabad News: कहते हैं भाई और बहन का रिश्ता दुनिया का सबसे पवित्र और सुरक्षा देने वाला रिश्ता होता है. लेकिन उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की बुद्धि विहार कॉलोनी में जो हुआ, उसने रिश्तों की हर परिभाषा को लहूलुहान कर दिया. शनिवार की शाम जब पोस्टमार्टम हाउस से डॉक्टर बाहर निकले, तो उनके चेहरों पर खौफ साफ दिख रहा था. 25 साल की हिमशिखा, जो गुरुग्राम की एक नामी आईटी कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर थी, उसकी लाश नहीं बल्कि जख्मों का एक पहाड़ था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उसके सगे भाई हार्दिक ने उस पर चाकू से एक या दो बार नहीं, बल्कि पूरे 84 वार किए थे. यह सिर्फ हत्या नहीं थी, यह एक ‘साइको किलर’ की वो दरिंदगी थी जिसने मेडिकल साइंस के जानकारों को भी हैरान कर दिया.

शरीर का कोई अंग नहीं बचा
मझोला थाने की पुलिस ने दो डॉक्टरों के पैनल से हिमशिखा का पोस्टमार्टम कराया. करीब दो घंटे चले इस प्रक्रिया की पूरी वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई गई. रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार की शाम जब पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आई, तो पुलिस महकमे में सन्नाटा पसर गया. दरअसल, हत्यारोपी भाई हार्दिक ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दी थीं. हिमशिखा के गर्दन, पैर, हाथ, पेट, छाती, कंधे, चेहरे और सिर पर ताबड़तोड़ वार किए गए थे.

डॉक्टरों ने पाया कि चाकू के हमलों से हिमशिखा का लिवर, किडनी और हार्ट पूरी तरह छलनी हो चुका था. उसके फेफड़े फट गए थे और पसलियां टूट चुकी थीं. गर्दन पर भी चार गहरे जख्म थे. डॉक्टरों के मुताबिक, यह हमला इतना हिंसक था कि शरीर का कोई भी अंग सुरक्षित नहीं बचा था. इतनी नृशंसता के पीछे छिपी नफरत ने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या कोई भाई इतना बेरहम हो सकता है?

‘मम्मी घर चलो, एक सरप्राइज देना है’
शुक्रवार की दोपहर मुरादाबाद के बुद्धि विहार सेक्टर-2 में जो ड्रामा हुआ, वह किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं था. नीलिमा, जो एक निजी बीमा कंपनी में ब्रांच असिस्टेंट मैनेजर हैं, अपने दफ्तर में काम कर रही थीं. उनका बेटा हार्दिक वहां पहुंचता है. उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी. उसने अपनी मां से बेहद सामान्य लहजे में कहा, ‘मम्मी घर चलो, आपको एक सरप्राइज देना है.’

नीलिमा को लगा शायद बच्चों ने घर पर कुछ खास प्लान किया है. वह बेटे के साथ कार में बैठकर घर पहुंचीं. जैसे ही उन्होंने घर का दरवाजा खोला, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. सामने फर्श पर उनकी जुड़वा बेटी हिमशिखा की खून से लथपथ लाश पड़ी थी. पूरे कमरे में खून की नदी बह रही थी. नीलिमा की चीख निकलती, उससे पहले ही हार्दिक ने उन पर भी चाकू से हमला कर दिया. नीलिमा के कंधे, सीने और उंगलियों पर चाकू के 6 गहरे वार लगे, लेकिन वे किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहीं.

‘ऑनलाइन इश्क’ ने बनाया कातिल
जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने के बाद हार्दिक अपनी कार लेकर मौका-ए-वारदात से फरार हो गया था. एसपी सिटी कुमार रण विजय सिंह ने बताया कि शनिवार दोपहर को पुलिस ने उसे ‘नया मुरादाबाद’ इलाके से गिरफ्तार कर लिया. जब पुलिस ने उससे पूछताछ शुरू की, तो उसकी बातें सुनकर अधिकारी भी सन्न रह गए. दरअसल, पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद जब कातिल इंजीनियर हार्दिक से पूछताछ शुरू हुई, तो जो सच सामने आया वह चौंकाने वाला था.

पुलिस पूछताछ में हार्दिक ने बताया कि वो एक ऐसी लड़की के प्यार में पागल था, जिसे उसने आज तक हकीकत में देखा भी नहीं था. पुणे की रहने वाली एक मुस्लिम युवती से उसका संपर्क ‘इंस्टाग्राम’ पर हुआ था. पिछले डेढ़ साल से दोनों के बीच ऑनलाइन बातें हो रही थीं. इंस्टाग्राम की छोटी सी खिड़की में हार्दिक ने अपनी पूरी दुनिया बसा ली थी. उसने पुलिस को बताया कि वह उस लड़की से शादी करना चाहता था, लेकिन उसे लगता था कि उसकी प्रेमिका के घरवाले उसे टॉर्चर कर रहे हैं. इसी काल्पनिक दुनिया और डिप्रेशन ने उसे एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया जहां उसे अपने ही परिवार के लोग दुश्मन नजर आने लगे.

बहन की सलाह बनी मौत का कारण
हार्दिक और हिमशिखा जुड़वां थे. दोनों ने साथ में इंजीनियरिंग की थी. हिमशिखा न केवल नौकरी कर रही थी, बल्कि अपना भविष्य संवारने के लिए एमबीए भी कर रही थी. दूसरी ओर, हार्दिक उस ऑनलाइन इश्क के चक्कर में अपनी नौकरी छोड़ चुका था और यूट्यूब पर कंटेंट बनाने के नाम पर दिन भर मोबाइल में डूबा रहता था. हिमशिखा अक्सर उसे टोकती थी.

वह उसे समझाती थी, ‘भाई, करियर पर ध्यान दो, ये सब छोड़ दो.’ लेकिन हार्दिक को लगता था कि उसकी बहन उसकी ‘पर्सनल लाइफ’ को कंट्रोल कर रही है. उसने पुलिस से कहा, ‘वो मुझे बोलती थी कि लड़की का चक्कर छोड़ और करियर पर ध्यान दे. उसने मुझे कई बार ताने दिए कि मैं एक लड़की के पीछे पागल होकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहा हूं. इसलिए मैंने उसे खत्म कर दिया.’

मां को क्यों मारना चाहता था?
बहन का कत्ल करने के बाद हार्दिक रुका नहीं. उसने अपनी मां नीलिमा पर भी चाकू से 6 वार किए. खुशनसीबी रही कि मां की जान बच गई. जब पुलिस ने पूछा कि मां को क्यों मारना चाहा, तो उसका जवाब किसी ठंडे दिमाग वाले अपराधी जैसा था. उसने कहा, ‘बहन को मारकर मैं तो जेल चला ही जाता, पीछे मां अकेली रह जाती और परेशान होती. मैंने सोचा उन्हें भी साथ ले जाऊं.’ ममता का कत्ल करने के पीछे की यह दलील सुनकर पुलिस वाले भी दंग रह गए.

एक बिखरा हुआ परिवार और मां की सिसकियां
नीलिमा मूल रूप से बदायूं के जोगीपुरा की रहने वाली हैं. 30 साल पहले वह मुरादाबाद आई थीं. 10 साल पहले पति से अलग होने के बाद उन्होंने अकेले ही दोनों जुड़वा बच्चों को पाल-पोसकर इंजीनियर बनाया. पिछले साल ही उन्होंने बदायूं की अपनी दुकान 25 लाख रुपये में बेची थी ताकि मुरादाबाद में अपना मकान बना सकें.

आज उसी घर में बेटी की चिता जल चुकी है और बेटा जेल की सलाखों के पीछे है. अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में भर्ती नीलिमा की हालत स्थिर है, लेकिन उनकी रूह जख्मी है. वह अपनी बेटी के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सकीं. शनिवार को हिमशिखा के मामा दीपू ने बदायूं से आकर उसे मुखाग्नि दी.

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