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इस बार मई-जून में गर्मी कितनी प्रचंड होगी, इसका अंदाजा मार्च में ही होने लगा है. मार्च के महीने में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा से लेकर राजस्थान तक पारा 35 से 38 डिग्री तक छूने लगा है. राजस्थान के कुछ हिस्सों और महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में तो अभी से लू चलने लगा है.  दुनिया भर के मौसम पर नजर रखने वाले वर्ल्ड मीटिरियोलॉजिकल आर्ग ने भी ऐसी ही चेतावनी दी है. उन्होंने इस साल गर्मी के दौरान अल नीनो (ENSO) की 60 फीसदी संभावनाओं की भविष्यवाणी की है. ये भयंकर गर्मी का संकेत है. इससे 2026-2027 में तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है. इसलिए, 2026-27 में एक सुपर अल नीनो के पहले 1982-83, 1997-98 और 2015-16 में भी प्रचंड गर्मी पड़ती थी.

वैज्ञानिकों  ने चेताया है कि यह अल नीनो का रिकॉर्ड दर्ज करने वाला वर्ष हो सकता है. इस साल के अंत में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में एक सुपर अल नीनो विकसित हो सकता है, जिससे दुनिया भर में मौसम के पैटर्न में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं. यूरोपीय सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) ने नए जलवायु के नए चेतावनी भरे आंकड़े जारी किए हैं. इस वर्ष के अंत में धरती एक शक्तिशाली और यहां तक एक सुपर अल नीनो का अनुभव कर सकती है, जो इतिहास के सबसे रिकॉर्ड गर्मी वाला साल हो सकता है.

एक सामान्य अल नीनो दुनिया के महाद्वीपों से लेकर वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है. भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में पानी का गर्म क्षेत्र यह निर्धारित करता है कि किन क्षेत्रों में सूखा, बाढ़ और अत्यधिक गर्मी पड़ सकती है.अल नीनो की घटना हर 10 से 15 साल में होती है. इसके कारण प्रचंड गर्मी पड़ती है, क्योंकि प्रशांत महासागर के उस महत्वपूर्ण क्षेत्र में समुद्र का तापमान औसत से 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ जाता है, जिससे वायुमंडल में गहरा बदलाव आता है.

अल नीनो के प्रभाव से लू के दिन बढ़ जाते हैं. बाढ़ लाने वाली भारी बारिश और सूखे के साथ तूफान आने और समुद्री बर्फ की घटती मात्रा जैसे खतरे सामने आते हैं.  पश्चिमी अमेरिका में औसत से अधिक गर्म ग्रीष्म ऋतु का सामना करना पड़ सकता है. कुछ उष्णकटिबंधीय देशों में गंभीर सूखा और भीषण गर्मी पड़ सकती है. प्रशांत महासागर में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की संख्या बढ़ सकती है और अटलांटिक महासागर में कम हो सकती है. जलवायु वैज्ञानिक डेनियल स्वेन ने एक्स पोस्ट में इसकी जानकारी दी है.

मौसम विज्ञानी एंडी हेजल्टन ने लिखा, जो हम अल नीनो के प्रभाव पर नजर रख रहे हैं, जो 1 जून से शुरू हो रहा है. सबसे शक्तिशाली अल नीनो घटनाएं लगभग हमेशा ही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का कारण बनती हैं. अल नीनो के दौरान महासागर से गर्मी निकलती है, प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में फैलती है, और फिर पूरी धरती पर भयंकर असर दिखता है. जलवायु वैज्ञानिक जीक हॉसफादर ने भी इस पर मुहर लगाई है. 

सबसे शक्तिशाली अल नीनो घटनाएं लगभग हमेशा ही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का कारण बनती हैं. इससे 2026 में प्रचंड गर्मी होगी, लेकिन क्या ये 2024 में सबसे गर्म वर्ष का रिकॉर्ड तोड़ेगी, ये अभी कहना जल्दबाजी होगी. 2027 के अब तक का सबसे गर्म वर्ष होने की प्रबल संभावना है. मौसम विज्ञानी एरिक वेब ने कहा, ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन के कारण, जलवायु प्रणाली एक बड़ी अल नीनो घटना से निकली ऊष्मा को प्रभावी ढंग से सोख नहीं कर पाती है. 

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