दिल्ली में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें खुद दिल्ली पुलिस का एक सिपाही नकली पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) बनाने के रैकेट में शामिल पाया गया. सिपाही अपने एक साथी के साथ मिलकर लोगों को कुछ ही घंटों में फर्जी पीसीसी बनाकर दे रहा था और इसके बदले 1000 से 2000 रुपये या उससे ज्यादा रकम वसूलता था.

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस नशीले पदार्थों की तस्करी की जांच कर रही थी. जांच के दौरान जब पुलिस ने एक किराए के मकान पर छापा मारा तो वहां से इस फर्जी रैकेट का भंडाफोड़ हो गया.

कौन हैं दोनों आरोपी

पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी सिपाही अरुण मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के मंडी का रहने वाला है और वह दक्षिण-पूर्व जिले के शाहीन बाग थाने में तैनात है. वह 2017 बैच का सिपाही है और उसे अपने पिता की जगह दिल्ली पुलिस में नौकरी मिली थी. अरुण का साथी तुषार उत्तर प्रदेश के पिलखुआ का रहने वाला है और वह कई थानों में पुलिस मित्र के तौर पर काम कर चुका है. दोनों मिलकर पिछले कई महीनों से नकली पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट बनाने का काम कर रहे थे.

दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस की नारकोटिक्स यूनिट ने हाल ही में आशीष नाम के एक ड्रग तस्कर को पकड़ा था. उसके पास से करीब 18 ग्राम MDMA बरामद हुई थी. पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि आशीष का सनलाइट कॉलोनी इलाके में एक किराए का मकान है. जब पुलिस ने उस मकान पर दबिश दी तो वहां सिपाही अरुण और उसका साथी तुषार मौजूद मिले. दोनों पिछले करीब छह महीने से इस मकान में रह रहे थे और करीब 35 हजार रुपये किराया दे रहे थे.

तलाशी में मिलीं कई मुहरें

पुलिस ने जब मकान की तलाशी ली तो वहां से बड़ी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और मुहरें बरामद हुईं. इनमें दिल्ली पुलिस के HHO , गाजियाबाद पुलिस और अन्य जगहों के पुलिस अधिकारियों की फर्जी स्टाम्प शामिल हैं. इसके अलावा पुलिस को वहां से भारी मात्रा में फर्जी पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट, खाली पीसीसी फॉर्म, दिल्ली पुलिस का फर्जी पहचान पत्र और कई अन्य संदिग्ध दस्तावेज भी मिले हैं. पुलिस का कहना है कि आरोपी अब तक सैकड़ों फर्जी पीसीसी बना चुके हैं.

दिल्ली पुलिस का असली पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए बनता है और इसमें आमतौर पर 10 से 15 दिन का समय लगता है. यह प्रमाण पत्र दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच जारी करती है. लेकिन आरोपी एचएचओ की नकली मुहर लगाकर कुछ ही घंटों में फर्जी पीसीसी तैयार कर देते थे. इसके बदले वे लोगों से 1000 से 2000 रुपये या उससे ज्यादा रकम लेते थे.

पुलिस ने दर्ज कीं दो FIR

इस मामले में सनलाइट कॉलोनी थाना पुलिस ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं. पहली एफआईआर नशीले पदार्थ की बरामदगी से जुड़ी है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक बरामद एमडीएमए खरीदने के लिए आरोपी सिपाही ने अपने मोबाइल से पेमेंट भी की थी. दूसरी एफआईआर फर्जी पहचान बनाकर नकली पीसीसी तैयार करने को लेकर दर्ज की गई है.

पुलिस अधिकारियों के अनुसार जब छापा मारा गया तो आरोपियों के मकान से एक विदेशी महिला भी मिली. बताया जा रहा है कि यह युवती उज्बेकिस्तान की रहने वाली है और काफी समय से इनके साथ रह रही थी. अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं इस महिला का संबंध नशीले पदार्थों की तस्करी या किसी और गतिविधि से तो नहीं है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में तैनात सब-इंस्पेक्टर राकेश कुमार भी इसी इलाके में रहकर नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल था.

हालांकि वह कई साल से फरार है. दिल्ली पुलिस ने मार्च 2025 में उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया था, लेकिन अभी तक वह पुलिस की पकड़ में नहीं आ पाया है.

पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) एक आधिकारिक दस्तावेज होता है जिसे दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच जारी करती है. यह प्रमाणित करता है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है.

इस दस्तावेज की जरूरत आमतौर पर-

  • विदेश में नौकरी
  • वीजा और इमिग्रेशन
  • किराएदार सत्यापन
  • या कुछ निजी नौकरियों के लिए पड़ती है.

दिल्ली पुलिस इसके लिए सिर्फ 10 रुपये शुल्क लेती है, जबकि आरोपी इसी प्रमाण पत्र को फर्जी तरीके से बनाकर 2000 रुपये तक वसूल रहे थे.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ फर्जी पीसीसी बनाने तक सीमित नहीं है. इसमें ड्रग तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिंक भी सामने आ सकते हैं. फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं.

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