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Chaitra Chhath Rules: 22 मार्च से चैत्र छठ का शुभारंभ हो गया है, जिसका समापन 25 मार्च को होगा. छठ पूजा हिंदू धर्म का सबसे कठिन व्रत माना जाता है. व्रती इस दौरान 36 घंटों का कठोर उपवास रखती हैं. इस त्योहार में शुद्धता, स्वच्छता और पवित्रता का विशेष महत्व है. इस व्रत में हर नियम का सख्ती से पालन करना बेहद आवश्यक है. इस समय की गई छोटी सी गलती पूजा के पूरे फल को विफल कर सकती है.

कई बार ऐसा होता है कि व्रत के दौरान महिलाओं के मासिक धर्म शुरू हो जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान पूजा और पूजा से संबंधित सामग्री का स्पर्श करना शुभ नहीं माना जाता है. ऐसे में छठ पूजा के दौरान जिन महिलाओं के मासिक धर्म (पीरियड्स) आ जाएं, उन्हें क्या करना चाहिए? आइए जानते हैं.

पीरियड्स में क्या छठ का व्रत जारी रख सकते हैं?

शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार, छठ पूजा एक ‘पीढ़ी दर पीढ़ी’ चलने वाली परंपरा है, जिसे एक बार शुरू करने के बाद बीच में नहीं छोड़ा जाता. यदि व्रत के दौरान मासिक धर्म शुरू हो जाए, तब भी व्रत को खंडित नहीं माना जाता और आप इसे पूरा कर सकती हैं. बस आपको पूजा की विधि में थोड़ा बदलाव करना होगा.

नियम और सावधानियां

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार, यदि व्रत के दौरान आपके पीरियड्स शुरू हो जाएं, तो आप पड़ोसियों या परिवार के किसी ऐसे सदस्य को चुनें, जो पूरी तरह शुद्ध हो. वह व्यक्ति आपके बदले प्रसाद बनाने से लेकर पूजा की सामग्री छूने तक के सारे काम करेगा.

  • पीरियड्स के दौरान व्रती महिला को प्रसाद जैसे ठेकुआ और पूरी नहीं बनानी चाहिए. यह कार्य आपके द्वारा चुना गया व्यक्ति ही करेगा.
  • खरना के दिन शाम को जल के साथ की जाने वाली मुख्य पूजा व्रती स्वयं कर सकती हैं, क्योंकि जल और दूध को कभी अशुद्ध नहीं माना जाता. हालांकि, भगवान को भोग लगाने का कार्य चुने गए व्यक्ति से ही कराएं.
  • आप घाट पर जा सकती हैं और पानी में खड़ी भी हो सकती हैं, लेकिन ध्यान रखें कि पूजा की टोकरी (दउरा), सूप और नारियल को स्पर्श न करें. आपके साथ खड़ा सहयोगी इन्हें पकड़ेगा और अर्घ्य देगा.
  • इस स्थिति में आप मन ही मन सूर्य देव और छठी मैया के मंत्रों का जाप करें. शारीरिक स्पर्श के बजाय ‘मानसिक पूजा’ सबसे उत्तम मानी गई है.

सहयोगी के लिए जरूरी निर्देश

जो सदस्य आपकी मदद कर रहा है, उसे भी व्रती के समान ही नियमों का पालन करना होगा:

  • सहयोगी को भी प्याज-लहसुन का त्याग करना होगा.
  • खरना का प्रसाद बनने तक उसे भी उपवास रखना होगा.
  • स्नान के बाद ही वह पूजा की किसी भी सामग्री को स्पर्श करेगा.

Chaitra Chhath Rules: 22 मार्च से चैत्र छठ का शुभारंभ हो गया है, जिसका समापन 25 मार्च को होगा. छठ पूजा हिंदू धर्म का सबसे कठिन व्रत माना जाता है. व्रती इस दौरान 36 घंटों का कठोर उपवास रखती हैं. इस त्योहार में शुद्धता, स्वच्छता और पवित्रता का विशेष महत्व है. इस व्रत में हर नियम का सख्ती से पालन करना बेहद आवश्यक है. इस समय की गई छोटी सी गलती पूजा के पूरे फल को विफल कर सकती है.

कई बार ऐसा होता है कि व्रत के दौरान महिलाओं के मासिक धर्म शुरू हो जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान पूजा और पूजा से संबंधित सामग्री का स्पर्श करना शुभ नहीं माना जाता है. ऐसे में छठ पूजा के दौरान जिन महिलाओं के मासिक धर्म (पीरियड्स) आ जाएं, उन्हें क्या करना चाहिए? आइए जानते हैं.

पीरियड्स में क्या छठ का व्रत जारी रख सकते हैं?

शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार, छठ पूजा एक ‘पीढ़ी दर पीढ़ी’ चलने वाली परंपरा है, जिसे एक बार शुरू करने के बाद बीच में नहीं छोड़ा जाता. यदि व्रत के दौरान मासिक धर्म शुरू हो जाए, तब भी व्रत को खंडित नहीं माना जाता और आप इसे पूरा कर सकती हैं. बस आपको पूजा की विधि में थोड़ा बदलाव करना होगा.

नियम और सावधानियां

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार, यदि व्रत के दौरान आपके पीरियड्स शुरू हो जाएं, तो आप पड़ोसियों या परिवार के किसी ऐसे सदस्य को चुनें, जो पूरी तरह शुद्ध हो. वह व्यक्ति आपके बदले प्रसाद बनाने से लेकर पूजा की सामग्री छूने तक के सारे काम करेगा.

  • पीरियड्स के दौरान व्रती महिला को प्रसाद जैसे ठेकुआ और पूरी नहीं बनानी चाहिए. यह कार्य आपके द्वारा चुना गया व्यक्ति ही करेगा.
  • खरना के दिन शाम को जल के साथ की जाने वाली मुख्य पूजा व्रती स्वयं कर सकती हैं, क्योंकि जल और दूध को कभी अशुद्ध नहीं माना जाता. हालांकि, भगवान को भोग लगाने का कार्य चुने गए व्यक्ति से ही कराएं.
  • आप घाट पर जा सकती हैं और पानी में खड़ी भी हो सकती हैं, लेकिन ध्यान रखें कि पूजा की टोकरी (दउरा), सूप और नारियल को स्पर्श न करें. आपके साथ खड़ा सहयोगी इन्हें पकड़ेगा और अर्घ्य देगा.
  • इस स्थिति में आप मन ही मन सूर्य देव और छठी मैया के मंत्रों का जाप करें. शारीरिक स्पर्श के बजाय ‘मानसिक पूजा’ सबसे उत्तम मानी गई है.

सहयोगी के लिए जरूरी निर्देश

जो सदस्य आपकी मदद कर रहा है, उसे भी व्रती के समान ही नियमों का पालन करना होगा:

  • सहयोगी को भी प्याज-लहसुन का त्याग करना होगा.
  • खरना का प्रसाद बनने तक उसे भी उपवास रखना होगा.
  • स्नान के बाद ही वह पूजा की किसी भी सामग्री को स्पर्श करेगा.
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