पिछले कारोबारी सत्र की मामूली राहत के बाद उम्मीद थी कि बाजार संभलेगा, लेकिन बाजार खुलते ही सेंसेक्स 1700 पॉइंट यानी 2.25 फीसदी से ज्यादा गिरकर 72,854 पर आ गया और निफ्टी 532 पॉइंट गिरकर 22,582 पर। ट्रंप का होर्मुज पर अल्टीमेटम और ईरान की जवाबी धमकी ने तो अपना असर दिखाया ही लेकिन इसके साथ ही कुछ और कारण भी जिनको समझना जरूरी है।

मिनटों में 12 लाख करोड़ रुपये की तबाही

बाजार खुला और मिनटों में निवेशकों की दौलत से 12 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए। BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप शुक्रवार के 429 लाख करोड़ से गिरकर 417 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। 12 लाख करोड़ की यह रकम इतनी बड़ी है कि इसे समझने के लिए तुलना जरूरी है। यह भारत के एक साल के रक्षा बजट से बहुत ज्यादा है। यह नुकसान किसी एक बड़े निवेशक का नहीं है, इसमें लाखों छोटे निवेशक भी शामिल हैं जिन्होंने अपनी बचत SIP और म्यूचुअल फंड में लगाई है। और यह सब महज चंद मिनटों में बाजार खुलने के साथ ही हुआ।

छोटे निवेशक सबसे ज्यादा पिटे

सेंसेक्स और निफ्टी की 2 फीसदी गिरावट तो सुर्खियों में है लेकिन असली मार उन निवेशकों पर पड़ी है जिनका पैसा मिडकैप और स्मॉलकैप में लगा है। BSE 150 मिडकैप और BSE 250 स्मॉलकैप ये दोनों 3 फीसदी से ज्यादा टूटे। पिछले कुछ सालों में लाखों नए निवेशक इन्हीं सेगमेंट में आए थे क्योंकि यहां रिटर्न ज्यादा था। लेकिन जब बाजार गिरता है तो यही सेगमेंट सबसे पहले और सबसे ज्यादा टूटता है। बड़े संस्थागत निवेशकों के पास रिस्क मैनेजमेंट के तरीके होते हैं। छोटे रिटेल निवेशक के पास सिर्फ इंतजार करने का विकल्प बचता है।

वैश्विक बाजार में हो रही तेज बिकवाली

भारत के साथ साथ आज जापान के निक्केई और कोरिया के कोस्पी सहित प्रमुख एशियाई बाजारों में 6 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार के विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया में चलने वाला युद्ध ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी करेगा। इस कारण से वैश्विक मुद्रास्फीति और बढ़ेगी, जिससे सख्त मौद्रिक नीतियां लागू करनी पड़ेगी।

भारत की तीन बड़ी मुसीबतें एक साथ

ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर टिका हुआ है और यह भारत के लिए सिर्फ तेल की कीमत का मसला नहीं है, यह एक पूरी डोमिनो चेन है। मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक भारत अपनी 80 फीसदी एनर्जी जरूरत बाहर से पूरी करता है। इसका मतलब है कि क्रूड महंगा हुआ तो सबसे पहले करेंट अकाउंट डेफिसिट यानी CAD बढ़ेगा। देश का आयात बिल फूल जाएगा, इससे रुपये पर दबाव बढ़ेगा जो पहले से रिकॉर्ड लो पर है। रुपया गिरेगा तो महंगाई और बढ़ेगी। महंगाई बढ़ेगी तो RBI ब्याज दरें ऊंची रखेगा। ब्याज दरें ऊंची रहीं तो कंपनियों की कमाई घटेगी और शेयर बाजार और गिरेगा। यह एक के बाद एक गिरते डोमिनो की तरह है जिसकी शुरुआत 110 डॉलर प्रति बैरल के क्रूड से होती है।

रुपया 93.89 के रिकॉर्ड लो पर

Bloomberg के आंकड़ों के मुताबिक रुपया सोमवार को 18 पैसे गिरकर 93.8925 के रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया। जंग शुरू होने के बाद से रुपया करीब 3 फीसदी गिर चुका है। लेकिन यह सिर्फ एक करेंसी का आंकड़ा नहीं है, इसका असर सीधे आपकी जेब पर पड़ता है। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों को भागने पर मजबूर करेगा जिससे बाजार और गिरेगा। इम्पोर्टेड दवाइयां, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स महंगे होंगे। पेट्रोल और रसोई गैस की कीमतें बढ़ने का दबाव बनेगा।

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