रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल
जब आंख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है।
शायद अमरीका और इसराईल द्वारा ईरान के विरुद्ध युद्ध छेडऩे की नीति उनके द्वारा किए जाने वाले तमाम दावों से भी अच्छे ढंग से गालिब के उक्त शे’र द्वारा व्यक्त की जा सकती है। यदि पहले सप्ताह के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम (जिसका अस्तित्व ही नहीं है) को समाप्त करने और सरकार बदलने के लिए खामेनेई तथा 10 जरनैलों का काम तमाम किया, दूसरा सप्ताह और जनरलों को मार कर सैन्य क्षमता समाप्त करने का था। इसके बाद आया तीसरा सप्ताह- ईरान की आॢथक क्षमता को नष्ट करने के लिए, ईरान के दक्षिण में स्थित और विश्व में सबसे बड़े और संवेदनशील गैस भंडार पर हमला किया गया ताकि अपनी बिजली और गैस की जरूरतें यहीं से पूरी करने वाले ईरान वासियों के लिए जीवन कठिन बना दिया जाए। 

कुल मिला कर अमरीका और इसराईल ने ईरान पर 1434  हमले किए हैं। हालांकि अमरीका के राष्टï्रपति डोनाल्ड ट्रम्प फरवरी के बाद से अब तक 7800 ठिकानों को निशाना बनाने का दावा करते हैं जिसके दौरान ‘कम्बैट मिशन’ के 8000 विमानों ने उड़ान भरी। ट्रम्प के दावे के अनुसार न सिर्फ ईरान के 120 समुद्री जहाज नष्ट कर दिए गए बल्कि इसराईल ने ईरान का जल वितरण प्लांट भी नष्टï कर दिया जिसके परिणामस्वरूप ईरान वासी पानी, बिजली और गैस से वंचित हो गए। ऐसा नहीं है कि ईरान ने जवाबी कार्रवाई नहीं की। ईरान ने अमरीकी और इसराईली हमलों के जवाब में इसराईल तथा पड़ोस में कतर, बहरीन और यू.ए.ई., लेबनान, ईराक, कुवैत, ओमान, जॉर्डन तथा अजरबैजान में ईंधन के ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई और जल वितरण प्लांटों पर हमलों के अलावा कतर के मुख्य गैस भंडार रासाफान पर हमला किया है, इसके साथ ही ब्रिटिश बेस डियागो गाॢसया, जो कि 4000 कि.मी. दूर है, पर भी हमला किया।

अहराज, मारून तथा गाशारन से मिलने वाला 90 प्रतिशत ईरानी तेल खार्ग द्वीप पर संग्रहित किया जाता है इसलिए यहां से तेल सभी देशों को होर्मुज स्ट्रेट से भेजा जाता है जिसे खोलने और खार्ग द्वीप पर कब्जा करने के मकसद से डोनाल्ड ट्रम्प ने 20 मार्च को अमरीका से 4000 जमीनी सैनिक भेजने के बाद जापान को भी 3000 सैनिक भेजने के लिए कहा है। खार्ग द्वीप ही पीने के पानी का भी प्राकृतिक स्रोत है। 21 मार्च को ट्रम्प ने कहा कि युद्ध लगभग समाप्त हो चुका है और हम यहां से हट जाएंगे। 22 को कहा कि हम युद्ध और तेज कर रहे हैं। ट्रम्प ने धमकी दी कि यदि ईरान ने 48 घंटों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला तो ईरान के पॉवर प्लांट्स को नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा, जबकि ईरान ने भी चेतावनी दी है कि यदि उसके पॉवर प्लांट्स पर हमला किया गया तो मध्य-पूर्व में अमरीका से संबंधित ऊर्जा अवसंरचनाओं पर जवाबी हमला करेंगे।

परंतु इस युद्ध के विश्व की अर्थव्यवस्था पर पडऩे वाले प्रभाव आने वाले कुछ समय तक समाप्त नहीं होंगे। अमरीका द्वारा ईरान के तेल निर्यात केंद्र ‘खार्ग’ द्वीप के 90 ठिकानों पर किए हमलों का प्रभाव केवल स्टॉक मार्कीट धराशायी होने या वित्तीय प्रभावों तक ही सीमित नहीं है, तेल उत्पादन प्रभावित होने से तेल के दाम प्रति बैरल 70 डॉलर से 110 से 126 डॉलर तक बढ़ सकते हैं जिसका गहरा प्रभाव व्यापार पर भी पड़ेगा और रोज की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। ईरानी सांसद एलैद्दीन बोरॉजर्रडी ने कहा है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले कुछ जहाजों से युद्ध की लागत के तौर पर 2 मिलियन डॉलर (लगभग 18.8 करोड़ रुपए) वसूल कर रहा है।

गैस के दाम 40 से 50 प्रतिशत तक चढ़ गए हैं, जरूरी खनिजों की कमी भी प्रभावित है क्योंकि युद्ध के कारण वैश्विक सल्फर सप्लाई जोकि ईरान से आती है, 45 प्रतिशत तक कम हुई है। हीलियम, जिसका उपयोग एम.आर.आई. मशीनों में एक सुपर कूलिंग एजैंट के तौर पर किया जाता है, की आपूॢत अवरुद्ध होने से भारत के एम.आर.आई. स्कैनिंग उद्योग के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है, क्योंकि यदि तरल हीलियम समाप्त हो जाए, तो एम.आर.आई. मशीन गर्म होकर काम करना बंद कर देगी। उर्वरक, ताम्बा उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। 

खाड़ी देश गम्भीर मंदी का सामना कर सकते हैं। यहां तक कि अपनी ‘मोसाइक डॉक्ट्रीन’, जो सैन्य क्षमताओं को विकेंद्रीकृत करते हुए लीडरों के मारे जाने पर खाली स्थान तुरंत भरने में इसे सक्षम बनाती है, पर निर्भर ईरान भी विशालतम खाड़ी देश के रूप में खुद को बचा नहीं सकेगा। इस सबके बीच प्रश्न उठता है कि सबसे बड़ा और ताकतवर मध्य-पूर्वी देश बनने की इसराईल की महत्वाकांक्षा और ट्रम्प के सबसे शक्तिशाली बनने के महान सपने को पूरा करने तथा अमरीकी जनता का ध्यान एपस्टीन फाइलों से हटाने के लिए छेड़े गए इस युद्ध की आधुनिक विश्व में कोई जगह होनी चाहिए?

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