पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की लीडरशिप जल्द ही बदल सकती है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। दरअसल आईएसआई चाहता है कि युवा व्यक्ति लश्कर का लीडर बने, क्योंकि लोगों में उम्रदराज लोगों की तुलना में युवा लोगों का क्रेज़ बढ़ रहा है। आईएसआई के अनुसार युवा व्यक्ति को लश्कर की कमान सौंपने से आतंकी संगठन के प्रति लोगों का समर्थन भी बढ़ सकता है।

हाफिज़ सईद से छिन जाएगी गद्दी, बेटे को मिलेगी कमान

लश्कर के संस्थापक और चीफ हाफिज़ सईद (Hafiz Saeed), जो भारत में मोस्ट वॉन्टेड आतंकी हैं और देश में हुए कई आतंकी हमलों का मास्टरमंद भी, की उम्र 78 वर्ष हो गई है। आईएसआई का मानना है कि हाफिज़ की पुरानी विचारधारा अब लोगों को प्रभावित नहीं कर रही है। ऐसे में जल्द ही उससे लश्कर की गद्दी छीनी जा सकती है और उसकी जगह उसके बेटे तल्हा सईद (Talha Saeed) को कमान सौंपने की तैयारी है। हाफिज़ के बाद उसका बेटा तल्हा ही लश्कर का दूसरा सबसे पावरफुल व्यक्ति है।

सैफुल्लाह कसूरी करेगा मदद

तल्हा को सही ढंग से लश्कर की लीडरशिप संभालने में सैफ़ुल्लाह कसूरी मदद करेगा। कसूरी, लश्कर का टॉप कमांडर है और उसे आईएसआई अधिकारियों का करीबी भी माना जाता है। पिछले साल भारत में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद कसूरी का नाम चर्चा में आ गया था, जब उसने इस आतंकी हमले की ज़िम्मेदारी ली थी। हालांकि जब भारत ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी, तब कसूरी ने डरकर निर्दोष होने की बात कही थी।

टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए भी युवा लीडरशिप ज़रूरी

तेज़ी से एडवांस हो रही टेक्नोलॉजी के इस दौर में आईएसआई को लगता है कि लश्कर जैसे आतंकी संगठनों को भी इसका इस्तेमाल करना चाहिए और पुराने तरीकों पर निर्भरता कम करनी चाहिए। आईएसआई का मानना है कि हाफिज़ जैसे बुज़ुर्ग लोग अगर लीडरशिप में रहे, तो टेक्नोलॉजी को अच्छे ढंग से अपनाना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि पुराने लोग अभी भी परंपरागत तरीकों को प्राथमिकता देते हैं। वहीं तल्हा जैसे युवा व्यक्ति के लश्कर की लीडरशिप संभालने से आतंकी संगठन टेक्नोलॉजी को अच्छे ठंड से अपना पाएगा।

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