महासमुंद, छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड का दौरा किया । इस दौरान उन्होंने बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न औषधीय पादप नर्सरियों का सघन निरीक्षण किया और क्षेत्रभ्रमण कर चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया. इस अवसर पर बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जे.ए.सी.एस.राव और विभिन्न अशासकीय संस्थाओं के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे, जिनकी मौजूदगी में जिले की विभिन्न नर्सरियों का जायजा लिया गया. निरीक्षण के दौरान भनपुरी स्थित नर्सरी एवं कृषक प्रशिक्षण केन्द्र में आगामी वर्षा ऋतु में वितरण हेतु तैयार किए जा रहे मण्डूकपर्णी, सतावर, बच और ब्राम्ही जैसे पौधों की गुणवत्ता की जांच की गई और संबंधित संस्थाओं को उच्च गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए गए.

अध्यक्ष विकास मरकाम ने कृषकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से पारंपरिक फसलों के स्थान पर औषधीय खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया. उन्होंने ग्राम तेन्दूलोता में बच और ब्राम्ही के कृषि क्षेत्र को विस्तार देने तथा किसानों को इसके आर्थिक लाभों के प्रति प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए. देवरी स्थित नर्सरी में उन्होंने विभिन्न ‘एग्रो फारेस्ट्री मॉडल’ जैसे सागौन के साथ लेमनग्रास, वेटिवर और पचौली के रोपण की सराहना करते हुए बताया कि इन अंतरवर्तिय फसलों के माध्यम से किसान कम समय में पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक मुनाफा कमा सकते हैं. साथ ही, यहाँ 10 प्रकार के औषधीय पौधों वाले ‘मल्टीलेयर प्लांटेशन’ मॉडल का भी अवलोकन किया गया.

दौरे के अगले चरण में डोंगरगांव और डोंगाझर नर्सरियों में सैलेशिया और सतावर की उन्नत ‘सिंपशेट्टी’ प्रजाति का निरीक्षण किया गया, जो अन्य प्रजातियों की तुलना में अधिक उत्पादन देती है. यहाँ उपयोग की जा रही नवीन तकनीकों जैसे रेनपाईप एप्लीकेशन और विड़मेट पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने ने निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में अधिक से अधिक किसानों को प्रशिक्षण से जोड़कर औषधीय एवं सुगंधित पादपों के कृषिकरण का विस्तार किया जाए. अंत में, उन्होंने वनों में औषधीय पौधों के सघन रोपण, उनके प्राथमिक प्रसंस्करण और स्थानीय जनजातियों, ग्रामीणों एवं परंपरागत वैद्यों को आवश्यकतानुसार पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित कर उन्हें लाभान्वित करने की कार्ययोजना पर बल दिया.





















