Chhattisgarh: सूरजपुर जिले के खड़गवां-सोनगरा मार्ग पर स्थित सुखदेवपुर का पुराना पुल अचानक पूरी तरह ध्वस्त हो जाने से क्षेत्र में जनजीवन ठप हो गया है. पुल टूटने से जहां एक ओर दर्जनों गांवों का संपर्क कट गया है, वहीं दूसरी ओर जगन्नाथपुर कोयला खदान से भटगांव CHP तक होने वाला कोयला परिवहन भी पूरी तरह रुक गया है. इस मार्ग से रोजाना सैकड़ों ट्रकों की आवाजाही होती थी, जो अब बंद हो चुकी है. इससे SECL को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है. लंबे समय से जर्जर इस पुल की मरम्मत को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों पर लापरवाही के आरोप भी लग रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है.
पुल ध्वस्त, जनजीवन पूरी तरह प्रभावित
सुखदेवपुर के इस पुराने पुल के टूटने से खड़गवां-सोनगरा मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है. इस मार्ग से जुड़े दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य सड़क से कट गया है, जिससे ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामकाज के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है. विद्यार्थियों, मरीजों और कामकाजी लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है.
कोयला परिवहन पर बड़ा असर
यह मार्ग जगन्नाथपुर कोयला खदान से भटगांव सीएचपी तक कोयला परिवहन का प्रमुख रास्ता था. प्रतिदिन करीब 300 कोयले से भरे ट्रक इसी पुल से गुजरते थे. पुल के टूटने के बाद ट्रकों के पहिए थम गए हैं, जिससे कोयला सप्लाई बाधित हो गई है. इससे SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) को करोड़ों रुपये का नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है.
25 साल पुराना था पुल
स्थानीय जानकारी के मुताबिक यह पुल प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लगभग 25 वर्ष पहले बनाया गया था. हालांकि बाद में सड़क का चौड़ीकरण किया गया, लेकिन पुलिया को नहीं बदला गया. समय के साथ पुल जर्जर हो गया और उसकी हालत बेहद खराब होती चली गई.
पहले भी हो चुके हैं कई हादसे
इस पुल की जर्जर स्थिति के कारण पहले भी कई हादसे हो चुके हैं. कई वाहन पुल से नीचे गिर चुके हैं. बीते बारिश के मौसम में कोयला कर्मियों से भरी एक बस भी इसी पुल से गिर गई थी, जिसमें कुछ लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हो गए थे. इसके बावजूद समय रहते सुधार कार्य नहीं किया गया.
प्रशासन और SECL पर लापरवाही के आरोप
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पुल की खराब स्थिति को लेकर कई बार शिकायतें की गई थीं, लेकिन न तो जिला प्रशासन और न ही SECL प्रबंधन ने इसको गंभीरता से लिया. लोगों का कहना है कि यदि समय पर मरम्मत या नए पुल का निर्माण कर दिया जाता, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती.
वैकल्पिक मार्ग की चुनौती
पुल टूटने के बाद सबसे बड़ी समस्या वैकल्पिक मार्ग की है. इस क्षेत्र में भारी वाहनों के लिए कोई सुरक्षित दूसरा रास्ता उपलब्ध नहीं है. ऐसे में कोयला परिवहन पूरी तरह से ठप हो गया है और प्रशासन के सामने जल्द समाधान ढूंढने की चुनौती खड़ी हो गई है.
धूल से मिली राहत, लेकिन बढ़ी मुश्किलें
हालांकि कोयला परिवहन रुकने से क्षेत्र में उड़ने वाली धूल और प्रदूषण से लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन आवागमन ठप होने से उनकी परेशानियां कई गुना बढ़ गई हैं. गांवों में आपूर्ति और आवश्यक सेवाओं पर भी असर पड़ने लगा है.
जल्द निर्माण की मांग तेज
स्थानीय लोग अब पुल के जल्द पुनर्निर्माण की मांग कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग क्षेत्र की जीवनरेखा है, इसलिए प्रशासन को प्राथमिकता के आधार पर नए पुल के निर्माण की कार्रवाई करनी चाहिए.
प्रशासन के सामने बड़ी परीक्षण
सुखदेवपुर पुल का ध्वस्त होना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह बुनियादी ढांचे की हालत पर भी सवाल खड़े करता है. अब देखना होगा कि प्रशासन इस संकट से निपटने के लिए कितनी तेजी से कदम उठाता है और कब तक क्षेत्र की आवाजाही सामान्य हो पाती है.



















