नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संकट का भारत पर कम से कम प्रभाव पड़े, इसके लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले कुछ समय में ताबड़तोड़ फैसले लिए हैं और शायद यही वजह है कि अन्य पड़ोसी मुल्कों से हम काफी बेहतर स्थिति में हैं। यहां हम उन पांच बड़े फैसलों पर बात कर रहे हैं, जो मोदी सरकार ने हाल के दिनों में देशहित में लिए हैं और उसका असर दिख रहा है।

पश्चिम एशिया से भारत के लिए कई तरह के सकारात्मक संकेत मिले हैं, लेकिन फिर भी ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जिस तरीक से युद्ध जारी है, उसने देश में काफी अनिश्चितता की स्थिति बना रखी है। ईरान ने भारतीय जहाजों समेत पांच अन्य देशों के लिए होर्मुज स्ट्रेट खोलने की घोषणा की है, फिर भी केंद्र सरकार हर संभावित संकट से उबरने के लिए लगातार एक्शन मोड में बनी हुई है।

पेट्रोल और डीजल से एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती

मोदी सरकार ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपये घटा दिया है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी मात्र तीन रुपये और डीजल पर शून्य रह गई है। ईरान युद्ध के बीच भारत सरकार का यह सबसे ताजा और बड़ा फैसला है।

  • कुछ पेट्रोलियम कंपनियों ने हाल में तेल के दाम बढ़ाने शुरू कर दिए थे।
  • लोग पहले से ही घबराहट में खरीदारी कर रहे हैं।
  • तेल कंपनियों पर कच्चे तेल के दाम बढ़ने का अलग दबाव है। इसे देखते हुए सरकार ने इतना बड़ा कदम उठाया है।
  • सरकार के इस कदम से आम लोगों को सबसे बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि उन्हें फिलहाल ज्यादा कीमत नहीं चुकानी पडे़गी।

पीएम मोदी और मुख्यमंत्रियों की बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से बात कर रहे हैं। कोविड के बाद पीएम मोदी की इस तरह की यह पहली पहल है और उन्होंने पश्चिम एशिया संकट से उबरने के लिए टीम इंडिया की भावना से आगे बढ़ना तय किया है।
देशभर में एलपीजी, पेट्रोल-डीजल की कालाबाजीरी और जमाखोरी रोकने के लिए यह बहुत बड़ा कदम है। राज्यों के सहयोग के बिना इन चुनौतियों से निपटना मुश्किल है।

  • इसके साथ-साथ अफवाह फैलाने वाली देश और समाज-विरोधी ताकतों पर नकेल कसने के लिए भी यह बहुत जरूरी है।
  • कैबिनेट सचिव पांच चुनावी राज्यों- पश्चिम बंगाल, केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी के मुख्य सचिवों से अलग से बात करेंगे। क्योंकि, इन राज्यों के सीएम आचार संहिता की वजह से पीएम की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में नहीं रह सकते।

खाड़ी के युद्ध क्षेत्र में युद्धपोतों की तैनाती

भारत संभवत: अकेला देश है, जो फारस की खाड़ी से निकल कर स्वदेश आने वाले भारतीय व्यापारिक जहाजों के लिए युद्ध क्षेत्र में अपनी नेवी के युद्धपोत तैनात कर दिए। अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए अपने सहयोगी देशों से लगातार कहता रह गया, लेकिन कोई तैयार नहीं हुआ।

  • इंडियन नेवी अपनी जंगी जहाजों के साथ न सिर्फ वहां तैनात है, बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी से निकलकर आने वाले तेल और एलपीजी टैंकरों को एस्कॉर्ट करते हुए भारतीय समुद्र तक लाने का भी काम कर रहा है।

संकट के बीच वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की व्यवस्था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में बताया कि पहले देश सिर्फ 27 देशों से ऊर्जा मंगवाता था, आज उनकी संख्या 41 हो चुकी है। भारत इस समय रूस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना जैसे देशों से भी एलपीजी मंगवा रहा है।

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