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प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य के मुख्यमंत्रियों के साथ, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाद और विमर्श किया। यह हमारे लोकतंत्र का संघीय चरित्र है। प्रधानमंत्री ने ईरान युद्ध से उपजे पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि वैश्विक हालात पर चर्चा की होगी। ऐसे ही संघीय संवाद कोरोना महामारी के दौरान भी किए गए थे। तब एक खास किस्म का विषैला, जानलेवा संक्रमण दुनिया भर में फैला था। भारत में लॉकडाउन के साथ-साथ कई सख्त कदम भी उठाए गए थे। हमारी अर्थव्यवस्था नकारात्मक हो गई थी। बेहद भयावह माहौल और हालात थे। बहरहाल आज वैसे हालात नहीं हैं। तेल-गैस, उर्वरक आदि की आपूर्ति अवरुद्ध हुई है, लिहाजा किल्लत महसूस हो रही है। कुछ संकट का दौर तो है। अफवाहों और दुष्प्रचार की ‘काली भेड़ों’ ने लॉकडाउन की फर्जी खबरें चलाना भी शुरू कर दिया है। मीडिया के एक वर्ग में यह विश्लेषण भी छापा गया कि देश में तेल-गैस का स्टॉक मात्र 7-9 दिन का है। शायद उसी से आम आदमी घबराया है और पेट्रोल पंपों पर जन-सैलाब की स्थितियां हैं। मारा-पीटी भी हुई है। पुलिस पर भी प्रहार किया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने हकीकत का खुलासा किया है कि देश में पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस (एलपीजी) का 60 दिन का स्टॉक सुरक्षित है। अगले 60 दिन के कच्चे तेल की बुकिंग सरकार ने कर ली है। करीब 8 लाख टन एलपीजी कार्गो सुरक्षित कर लिए गए हैं। वे रूस, अमरीका, ऑस्टे्रलिया आदि कई देशों से आ रहे हैं। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इराक, रूस आदि देशों से कच्चा तेल आ रहा है। यह आपूर्ति 60 दिन के लिए सुनिश्चित कर ली गई है। देश के एक लाख पेट्रोल पंपों में से एक पर भी पेट्रोल-डीजल खत्म नहीं हुए हैं। लगातार सप्लाई जारी है। देश में करीब 3.3 करोड़ मीट्रिक टन एलपीजी की सालाना खपत होती है और हमारी रिफाइनरियां हररोज औसतन 50,000 टन एलपीजी का उत्पादन कर रही हैं।

उत्पादन 40 फीसदी बढ़ाया गया है। यदि जमाखोर, कालाबाजारी, मुनाफाखोर, चोर-लुटेरे, देश-विरोधी लोग सरकार के इस खुलासे से आश्वस्त नहीं हैं, तो देश में दूसरा कौनसा वैकल्पिक माध्यम है, जो तेल-गैस की अपडेट वस्तुस्थिति देश को बता सके? आप सरकार-विरोधी, प्रधानमंत्री-विरोधी, नीति-विरोधी हो सकते हैं, लेकिन राजनीतिक दुराग्रह भारत-विरोध की हद तक नहीं पहुंचना चाहिए। संकट, आपदा और तात्कालिक धक्का आदि समानार्थी शब्द लगते हैं, लेकिन ये अलग-अलग स्थितियों को बयां करते हैं। अमरीका और इजरायल ने ईरान पर युद्ध की शुरुआत की और ईरान ने पलटवार में खाड़ी देशों के तेल-गैस ठिकानों को तबाह किया। 17 अमरीकी बेस भी मिट्टी-मलबा कर दिए। नतीजतन आज एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ग्लोबल साउथ के 113 देश प्रभावित हो रहे हैं। ऑस्टे्रलिया, न्यूजीलैंड, वियतनाम, कंबोडिया, म्यांमार, फिलीपींस, स्लोवाकिया, कनाडा, थाईलैंड, नाइजीरिया, लाओस, जर्मनी, फ्रांस सरीखे देशों में आपातकाल, कार-फ्री डे, पेट्रोल पंप तालाबंदी, राशनिंग और ऑड-ईवन आदि के हालात बने हैं। जापान जैसे विकसित देश को अपना रिजर्व तेल जारी करना पड़ा है। दुनिया में 140 अरब टन एलपीजी की कमी बताई जा रही है। कच्चे तेल का संकट अलग है। अमरीका में भी पेट्रोल-डीजल के दाम 22 फीसदी उछल गए हैं। कमोबेश भारत में अभी आपातकाल की स्थिति नहीं है। आम आदमी के लिए सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम भी महंगे नहीं किए हैं। मोदी ने इन्हीं बिंदुओं के आसपास मुख्यमंत्रियों से बात की होगी।

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