भोपाल: मध्यप्रदेश की मूल निवासी और केरल कैडर की आईपीएस अधिकारी निमिषा त्रिपाठी एक बड़े विवाद में घिर गई हैं। उनके द्वारा प्रस्तुत EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) सर्टिफिकेट को लेकर जांच शुरू हो गई है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। जानकारी के अनुसार, निमिषा त्रिपाठी ने सिविल सेवा परीक्षा के दौरान EWS श्रेणी का लाभ लिया था। अब इस सर्टिफिकेट की वैधता पर सवाल उठे हैं और इसी आधार पर जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के मुताबिक, आरोप है कि EWS प्रमाण पत्र जारी करते समय निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। यदि जांच में यह साबित हो जाता है कि सर्टिफिकेट नियमों के खिलाफ जारी हुआ था या गलत जानकारी के आधार पर लिया गया था, तो यह मामला गंभीर रूप ले सकता है।
हो सकती है कड़ी कार्रवाई
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो निमिषा त्रिपाठी पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। यहां तक कि उनकी सेवा पर भी असर पड़ सकता है। कुछ मामलों में ऐसे अधिकारियों को डिमोट करके निचली सेवा (lower service) में भेजने तक की नौबत आ सकती है।
क्यों अहम है यह मामला?
यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि देश में पहली बार किसी आईपीएस अधिकारी के खिलाफ इस स्तर पर EWS प्रमाण पत्र की जांच हो रही है। इससे आने वाले समय में भर्ती प्रक्रिया और आरक्षण से जुड़े नियमों पर भी असर पड़ सकता है।
प्रशासन की नजर में मामला
फिलहाल जांच जारी है और संबंधित विभाग दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि निष्पक्ष जांच के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।



















