Sankashti Chaturthi 2026: विकट संकष्टी चतुर्थी वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है. साल 2026 में यह पर्व 5 अप्रैल को मनाया जाएगा. यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित है. हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है. मान्यता है कि उनकी आराधना से सभी दुख, बाधाएं और संकट दूर होते हैं, इसी कारण उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है.

विकट संकष्टी चतुर्थी 2026: तिथि और मुहूर्त

  • तिथि: 5 अप्रैल 2026, रविवार
  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: सुबह 11:59 बजे (5 अप्रैल)
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: दोपहर 2:10 बजे (6 अप्रैल)

पूजा सामग्री

  • भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र
  • अक्षत
  • रोली
  • चंदन
  • कुमकुम
  • दूर्वा
  • धूप
  • अगरबत्ती
  • शुद्ध घी का दीपक
  • कलश
  • मौली
  • सुपारी
  • गंगाजल
  • कपूर
  • आरती की थाली
  • फूल
  • फल
  • लड्डू और मोदक

पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें.
  • एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें.
  • मूर्ति पर गंगाजल छिड़कें, सिंदूर का तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें.
  • 21 दूर्वा की गांठें “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करते हुए अर्पित करें.
  • फूल, माला और भोग चढ़ाएं.
  • घी का दीपक जलाएं, धूप दिखाएं और संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा पढ़ें या सुनें.
  • अंत में भगवान गणेश की आरती करें.
  • रात्रि में चंद्रमा के दर्शन के बाद उन्हें जल, दूध और अक्षत से अर्घ्य दें.
  • इसके बाद व्रत का पारण करें.

प्रिय भोग: मोदक और लड्डू बप्पा के सबसे प्रिय भोग माने जाते हैं. इसके अलावा सफेद तिल के लड्डू, गुड़ और नारियल का भोग भी लगाया जा सकता है.

फूल: मान्यता है कि भगवान गणेश को लाल रंग के फूल, विशेषकर गुड़हल और गेंदे के फूल अर्पित करना शुभ होता है.

शुभ रंग: इस दिन पीले या लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. ये रंग उत्साह और ऊर्जा के प्रतीक हैं.

भगवान गणेश जी के मंत्र

  1. वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ. निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
  2. ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
  3. ॐ लम्बोदराय नमः॥
  4. ॐ गं गणपतये नमः॥
  5. ॐ श्री गणेशाय नमः॥
  6. ॐ नमो भगवते गजाननाय. ॐ वक्रतुण्डाय हुं॥
  7. ॐ नमो सिद्धि विनायकाय सर्वकार्यकर्त्रे सर्वविघ्नप्रशमनाय सर्वराज्यवश्यकरणाय सर्वजन सर्वस्त्री पुरुष आकर्षणाय श्रीं ॐ स्वाहा॥
  8. ॐ हीं श्रीं क्लीं गौं गः श्री महागणधिपतये नमः॥
  9. हीं श्रीं क्लीं गौं वरमूर्तये नमः. ॐ गं गणपतये नमः॥
  10. हीं श्रीं क्लीं नमो भगवते गजाननाय. ॐ वक्रतुण्डाय हुं॥

महत्व

“संकष्टी” का अर्थ होता है- संकटों को हरने वाला. मान्यता है कि विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं. ज्योतिषीय दृष्टि से इस दिन पूजा करने पर कुंडली में बुध और केतु के दोषों का प्रभाव कम होता है तथा संतान सुख की प्राप्ति होती है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.)

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