सनातन धर्म में दस महाविद्याओं का विशेष महत्व है. मां काली, मां तारा, मां त्रिपुरसुंदरी से लेकर मां कमला तक, जानिए दसों देवियों के स्वरूप, मंत्र, धार्मिक मान्यताओं और प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में.
10 Mahavidya: मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के बारे मे तो हम सब जानते है. पर क्या आपको दस महाविद्याओं के बारे मे पता है, आइए जानते है दसों महाविद्याओं कि कथा, मंत्र और प्रमुख मंदिर.
पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जब माता सती ने अपने पिता दक्ष के घर यज्ञ में जाने की इच्छा जताई, तो भगवान शिव ने उन्हें वहां जाने से मना कर दिया. शिवजी की बात सुनकर माता सती गुस्से में आ गईं. उन्होंने पहले मां काली का रूप धारण किया और फिर दसों दिशाओं में अपनी दस अलग-अलग शक्तियां प्रकट कीं. माता के इस रूप को देखकर भगवान शिव भी घबरा गए. इसके बाद माता सती ने स्पष्ट कर दिया कि वह अपने पिता दक्ष के घर यज्ञ में जरूर जाएंगी. उन्होंने कहा कि या तो वह यज्ञ में अपना हिस्सा लेंगी या फिर उसे नष्ट कर देंगी.
माता सती के इस रूप को देखकर भगवान शिव उनके सामने आए और पूछा कि ये सभी कौन हैं. तब माता ने बताया कि ये उनकी दस महाविद्याएं हैं. उनके सामने काले रंग में दिखाई देने वाली देवी काली हैं, ऊपर नीले रंग वाली देवी तारा हैं. पश्चिम दिशा में छिन्नमस्ता, बाईं ओर भुवनेश्वरी, पीठ के पीछे बगलामुखी, दक्षिण-पूर्व दिशा में धूमावती, दक्षिण-पश्चिम में त्रिपुर सुंदरी, उत्तर-पश्चिम में मातंगी और उत्तर-पूर्व में षोडशी विराजमान हैं. वहीं, माता सती स्वयं भैरवी रूप में भगवान शिव के सामने खड़ी थीं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन्हीं दस स्वरूपों को दस महाविद्या कहा जाता है. बाद में माता ने अपनी इन्हीं शक्तियों का इस्तेमाल दैत्यों और राक्षसों को मारने के लिए किया था.
दस महाविद्याओं के नाम
- मां काली
- मां तारा
- मां त्रिपुरसुंदरी
- मां भुवनेश्वरी
- मां छिन्नमस्ता
- मां त्रिपुरभैरवी
- मां धूमावती
- मां बगलामुखी
- मां मातंगी
- मां कमला
मान्यताओं के अनुसार, उनके स्वभाव के आधार पर दस महाविद्याओं को तीन समूहों में बांटा गया है:
- पहला समूह(श्रीकुल): सौम्य स्वरूप वाली देवियों का है.त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी,मातंगी और कमला शामिल हैं.
- दूसरा समूह(कालीकुल): उग्र स्वरूप वाली देवियों का है. मां काली, छिन्नमस्ता, धूमावती और बगलामुखी आती हैं.
- तीसरे समूह(मिश्रित): सौम्य और उग्र दोनों स्वरूप वाली देवियां शामिल हैं. (मां तारा और त्रिपुर भैरवी का नाम आता है.
1. मां काली
मां काली दस महाविद्याओं में पहली हैं. वे पूरे ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली और उग्र शक्ति का प्रतीक हैं. बड़े-बड़े राक्षसों का वध करने के लिए माता ने यह रूप धारण किया था. माँ काली को जल्दी प्रसन्न होने वाली देवी माना जाता है, लेकिन वे जल्दी नाराज भी हो जाती हैं.
मंत्र: : “ऊं ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके स्वाहा”
मां काली के प्रमुख मंदिर
- कालीघाट (कोलकाता)
- गढ़कालिका (उज्जैन)
- महाकाली मंदिर (पावागढ़, गुजरात)
2. मां तारा
भगवती तारा को भक्तों को हर मुश्किल से पार लगाने वाली देवी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता तारा अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उन्हें जीवन में आने वाली परेशानियों से लड़ने की शक्ति देती हैं. कहा जाता है कि महर्षि वशिष्ठ ने सबसे पहले माता तारा की आराधना की थी. दस महाविद्याओं में माता तारा का विशेष महत्व है. उनकी पूजा करने से भक्तों को साहस, ज्ञान और संकटों से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है.
मंत्र: “ऊं ह्नीं स्त्रीं हुम फट”
मां तारा के प्रमुख मंदिर
- तारापीठ (बीरभूम, पश्चिम बंगाल)
- तारा देवी मंदिर (शिमला, हिमाचल प्रदेश)
3. मां त्रिपुरसुंदरी
मां त्रिपुरसुंदरी दस महाविद्याओं में तीसरे स्थान पर मानी जाती हैं. उन्हें सुंदरता, शक्ति और ज्ञान की देवी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता त्रिपुरसुंदरी तीनों लोकों में सबसे सुंदर और दिव्य स्वरूप वाली देवी हैं. उन्हें ललिता और षोडशी के नाम से भी जाना जाता है. माता की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक शक्ति का आशीर्वाद मिलता है.
मंत्र: “ऐ ह्नीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः”
मां त्रिपुरसुंदरी के प्रमुख मंदिर
- त्रिपुरसुंदरी मंदिर (त्रिपुरा)
4. मां भुवनेश्वरी
मां भुवनेश्वरी को संपूर्ण ब्रह्मांड की प्रमुख देवी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे पूरे संसार की रचयिता और पालनहार हैं. मां भुवनेश्वरी को आदिशक्ति का स्वरूप माना जाता है और कहा जाता है कि सभी देवी-देवताओं को शक्ति उन्हीं से प्राप्त होती है. उनकी साधना करने से व्यक्ति को तेज, आत्मबल, सौंदर्य और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है. भक्त मां भुवनेश्वरी की पूजा करके सुख, शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा की कामना करते हैं.
मंत्र: “ह्रीं भुवनेश्वरीयै ह्रीं नमः”
मां भुवनेश्वरी के प्रमुख मंदिर
- तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कई मंदिरों में मां भुवनेश्वरी की पूजा होती है.
- केरल के तिरुवनंतपुरम में मां भुवनेश्वरी का प्रसिद्ध मंदिर है.
5. मां छिन्नमस्ता
मां छिन्नमस्ता को तंत्र शास्त्र में शक्ति, आत्मबल और आत्मनियंत्रण की देवी माना जाता है. वे कुंडलिनी जागरण और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी साधना से साधक को आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है और वह सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठने का प्रयास करता है.
मंत्र: “श्रीं ह्रीं ऐं वज्र वैरोचानियै ह्रीं फट स्वाहा”
मां छिन्नमस्ता के प्रमुख मंदिर
- झारखंड के रजरप्पा मंदिर में मां छिन्नमस्ता की पूजा की जाती है. इसे उनका प्रमुख तीर्थस्थल माना जाता है.
- असम के कामाख्या मंदिर में भी मां छिन्नमस्ता की पूजा होती है.
6. मां त्रिपुरभैरवी
मां त्रिपुर भैरवी को तंत्र साधना की प्रमुख देवी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे शक्ति, भोग और मोक्ष की देवी हैं. उनकी साधना से भक्तों को आत्मबल, आत्मनियंत्रण और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है. मां त्रिपुर भैरवी को साधकों को तंत्र विद्या में सफलता और विशेष सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी भी माना जाता है.
मंत्र: “ह्रीं त्रिपुर भैरव्यै स्वाहा”
मां त्रिपुरभैरवी के प्रमुख मंदिर
- उत्तराखंड और असम में मां त्रिपुर भैरवी के कई मंदिर हैं.
- असम के कामाख्या मंदिर में भी मां त्रिपुर भैरवी की साधना की जाती है.
7. मां धूमावती
मां धूमावती को तंत्र शास्त्र में “विधवा देवी” कहा जाता है. वे सभी प्रकार की बाधाओं, शत्रु शक्तियों और दुर्भाग्य को नष्ट करने वाली देवी मानी जाती हैं. मां धूमावती की साधना से व्यक्ति को भय, नकारात्मकता और दुर्भाग्य से मुक्ति मिलती है, ऐसी धार्मिक मान्यता है.
मंत्र: “धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहा”
मां धूमावती के प्रमुख मंदिर
- कामाख्या शक्तिपीठ, असम.
- वाराणसी और मध्यप्रदेश में कुछ विशेष धूमावती मंदिर हैं.
8. मां बगलामुखी
मां बगलामुखी को शत्रुओं पर विजय, वाणी सिद्धि और मुकदमों में सफलता दिलाने वाली देवी माना जाता है. मां बगलामुखी तंत्र साधकों की प्रिय देवियों में से एक हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी पूजा करने से व्यक्ति को आत्मबल, साहस और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है.
मंत्र: “ह्लीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलम बुद्धिं विनाशय ह्लीं स्वाहा”
मां धूमावती के प्रमुख मंदिर
- दतिया (मध्य प्रदेश) में मां बगलामुखी का प्रसिद्ध मंदिर है.
- कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) में मां बगलामुखी का सिद्ध शक्तिपीठ है.
- नलखेड़ा (मध्य प्रदेश) मां बगलामुखी की साधना के लिए प्रसिद्ध है.
9. मां मातंगी
मां मातंगी को तंत्र की सरस्वती कहा जाता है. वे संगीत, कला, विद्या और तंत्र विद्या की देवी मानी जाती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां मातंगी की पूजा करने से व्यक्ति की वाणी प्रभावशाली बनती है और उसकी बुद्धि, ज्ञान व रचनात्मक क्षमता में वृद्धि होती है.
मंत्र: “ह्रीं ऐं मातंग्यै नमः”
मां मातंगी के प्रमुख मंदिर
- मां मातंगी मंदिर, नीलाचल पहाड़ी, गुवाहाटी (असम)
- मां मातंगी दुर्गा देवी मंदिर, गुलरिया (नेपाल)
- दक्षिण भारत के कुछ स्थानों पर मां मातंगी के मंदिर हैं.
10. मां कमला
मां कमला दस महाविद्याओं में से एक हैं. उनका स्वरूप मां लक्ष्मी के समान माना जाता है. मां कमला को धन और सुख-समृद्धि की देवी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी पूजा करने से व्यक्ति को व्यापार, परिवार और आर्थिक जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद मिलता है.
मंत्र: “ऊं श्रीं ह्रीं क्लीं कमलवासिन्यै स्वाहा”
मां कमला के प्रमुख मंदिर
- लक्ष्मी माता के कई प्रसिद्ध मंदिरों में मां कमला की पूजा की जाती है.
- त्रिपुरा और तमिलनाडु में भी मां कमला के कुछ मंदिर बताए जाते हैं.



















