नई दिल्ली: बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोलते हुए 1957 के दौर को कांग्रेस का काला अध्याय बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय भारत दो महाशक्तियों, अमेरिका और रूस का लगभग उपनिवेश बन गया था। निशिकांत दुबे ने रविवार को एक्स पर कुछ पेपर्स शेयर किए हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा है कि 5 अप्रैल, 1957 को ईएमएस नंबूदिरिपाद के नेतृत्व में केरल की पहली निर्वाचित कम्युनिस्ट सरकार का गठन हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने अमेरिका और सीआईए के साथ मिलकर राज्य सरकार को अस्थिर करने की साजिश रची थी।

निशिकांत दुबे का कांग्रेस पर बड़ा आरोप

निशिकांत दुबे ने अपने ‘एक्स’ पोस्ट की शुरुआत में लिखा, ‘कांग्रेस का काला अध्याय।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘5 अप्रैल 1957, भारत में इसी दिन नंबूदिरिपाद जी के नेतृत्व में केरल में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार बनी थी। मुख्यमंत्री बनते ही नंबूदिरिपाद सीधे सोवियत रूस जाकर ख्रुश्चेव से आर्थिक और सैन्य सहयोग लेना चाहते थे। वो भारत में खूनी आंदोलन कर सत्ता हासिल करना चाहते थे।दूसरी तरफ अमेरिकी सरकार और CIA से सीधे मदद लेकर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष इंदिरा गांधी और प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू कम्युनिस्ट सरकार को गिराने की साजिश रच रहे थे।

दो वैश्विक शक्तियों की बात, कांग्रेस पर सीधा अटैक

निशिकांत दुबे ने आगे लिखा कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहावर ने भारत सरकार और इंटेलिजेंस एजेंसी के साथ मिलकर सत्ता परिवर्तन किया। भारत में रूस और अमेरिका सरकार, आंदोलन, चुनाव का नतीजा तय करने लगे। भारत दोनों महाशक्ति का उपनिवेश बना। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाते हुए कहा कि उस समय अमेरिकी सरकार और सीआईए ने केरल की कम्युनिस्ट सरकार को हटाने की साजिश में कांग्रेस नेतृत्व की मदद दी थी।

निशिकांत दुबे ने शेयर किए कुछ दस्तावेज, जानें उसमें क्या

निशिकांत दुबे ने यह भी कहा कि दोनों महाशक्तियां भारत में आंदोलनों और चुनावों के परिणामों को प्रभावित करने लगी थीं, जिससे देश इन दोनों का उपनिवेश बन गया। इसके अलावा, उन्होंने कुछ कथित दस्तावेज भी साझा किए और दावा किया कि अमेरिकी अधिकारियों और राजनयिकों ने कम्युनिस्ट पार्टी के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए कांग्रेस को वित्तीय सहायता देने की बात स्वीकार की थी।

एक दिन पहले भी पोस्ट करके कांग्रेस को घेरा

4 अप्रैल को भी निशिकांत दुबे ने कुछ दस्तावेजों के साथ सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट किया था। इसमें लिखा कि 4 अप्रैल 1910 आज ही के दिन महर्षि अरविंद पांडेचेरी/ पुडुचेरी भारत छोड़कर आए। 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस दो फाड़ हो गई- नरम दल और गरम दल। गरम दल यानी राष्ट्रवादी विचारधारा, जिसने नेहरू के 1929 के पहले 1907 में पूर्ण स्वराज का नारा दिया, उसके अध्यक्ष महर्षि अरविंद बने।

महर्षि अरविंद का जिक्र कांग्रेस पर लगाए आरोप

निशिकांत दुबे ने आगे लिखा, ‘1908 में मुजफ्फरपुर बम विस्फोट हुआ, खुदीराम बोस को 18 साल की उम्र में फांसी दी गई। पीसी चाकी ने आत्महत्या की। इस कांड के मुख्य अभियुक्त महर्षि अरविंद बनाए गए, वे जेल गए। कांग्रेस ने साथ नहीं दिया, उल्टा 1910 में एक अंग्रेज विलियम्स को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया। ब्रिटिश हुकूमत के जुल्म से बचने के लिए महर्षि अरविंद फ्रांस हुकूमत पांडेचेरी गए। मोतीलाल नेहरू और नेहरू से खिलाफत आंदोलन, क्रिस्प मिशन और खासकर 1947 के भारत विभाजन पर उनके गहरे मतभेद रहे।

बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि नेहरू ने हमेशा महर्षि अरविंद को देशद्रोही कहा। आजादी के बाद भी नेहरू ने महर्षि अरविंद को भारत नहीं आने दिया। लोकमान्य तिलक, लाला लाजपतराय, शहीद भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, महर्षि अरविंद, अंबेडकर को नेहरू परिवार ने देशवासियों के सामने गलत तरीके से पेश किया। महर्षि अरविंद का योगदान भारत की आजादी के इतिहास से गायब हो गया ।’

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